विरासत और आस्था को मिलेगा नया स्वरूप
- भरतपुर की पहचान केवल केवलादेव अभयारण्य से ही नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ी है।
- शहर के प्रसिद्ध बिहारीजी मंदिर, गंगाजी मंदिर और लक्ष्मणजी मंदिर अब नए स्वरूप में नजर आने वाले हैं।
- राजस्थान सरकार इन ऐतिहासिक धरोहरों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य करा रही है।
तीन प्रमुख मंदिरों पर विशेष फोकस
- लोहागढ़ किले स्थित बिहारीजी मंदिर के लिए 3.33 करोड़ रुपये, गंगाजी मंदिर के लिए 13 करोड़ रुपये से अधिक
- और लक्ष्मणजी मंदिर के लिए 1.25 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
- इसके अलावा मंदिरों के आसपास के बाजार क्षेत्र को हेरिटेज लुक देने के लिए भी अलग से राशि खर्च की जा रही है।
इतिहास और लोक आस्था का संगम
- ये तीनों मंदिर भरतपुर की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
- बिहारीजी मंदिर अपनी लोक-मान्यताओं, गंगाजी मंदिर अपनी भव्य स्थापत्य शैली और लक्ष्मणजी मंदिर राजपरिवार की आस्था से जुड़े इतिहास के लिए प्रसिद्ध हैं।
- जीर्णोद्धार के दौरान मूल स्थापत्य कला और पारंपरिक नक्काशी को संरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
- मंदिरों के विकास से केवलादेव अभयारण्य आने वाले पर्यटकों को भरतपुर की सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
- यह परियोजना आस्था, इतिहास और पर्यटन को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
संरक्षण के साथ निगरानी भी जरूरी
- विशेषज्ञों का मानना है कि विकास कार्यों के साथ मंदिरों की मूल पहचान और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है।
- तभी यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सकेगी।
लेखिका- तनु रूंगटा


