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मरूभूमि में खजूर की खेती का कमाल: 270 पौधों से किसान की 10 लाख सालाना आय

  • गाँव मंच, डेस्क राजस्थान के पाली जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है।
  • यहां मरूभूमि में खजूर की खेती ने एक किसान की आर्थिक तस्वीर बदल दी है।
  • सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के खोड़ मंडल स्थित खैरोफड़ा गांव में विकसित खजूर का बाग अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन रहा है।
  • हाल ही में पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने इस बाग का दौरा किया।
  • उन्होंने प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण आधारित इस मॉडल की सराहना की।
  • साथ ही, इसे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

पांच साल की मेहनत ने दिलाई बड़ी सफलता

  • किसान ने करीब पांच वर्ष पहले अपने खेत में खजूर के 270 पौधे लगाए थे।
  • शुरुआत में यह एक प्रयोग था। हालांकि, सही देखरेख और बेहतर प्रबंधन ने इसे सफल बना दिया।
  • आज सभी पौधे पूरी तरह विकसित हो चुके हैं। इतना ही नहीं, वे नियमित रूप से उत्पादन भी दे रहे हैं।
  • मुख्य उपलब्धियां:
  • 270 खजूर के पौधों का सफल बाग।
  • पांच वर्षों में तैयार हुआ उत्पादन मॉडल।
  • सालाना लगभग 10 लाख रुपये की आय।
  • सीमित संसाधनों में बेहतर लाभ।

किसान की यह सफलता अब आसपास के किसानों को भी प्रेरित कर रही है।

खजूर की खेती का निरीक्षण करते हुए किसानों से चर्चा करते अतिथि, आधुनिक कृषि और जल संरक्षण मॉडल का अवलोकन करते हुए।

ड्रिप सिंचाई और प्राकृतिक खेती का सफल मॉडल

  • इस बाग की सबसे बड़ी विशेषता इसका टिकाऊ कृषि मॉडल है।
  • यहां बूंद-बूंद सिंचाई तकनीक अपनाई गई है। इससे पानी की बचत होती है।
  • वहीं, फसल को पर्याप्त नमी भी मिलती है।
  • इसके अलावा, किसान रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं करता। पौधों को पूरी तरह प्राकृतिक खाद दी जाती है।

इस मॉडल के प्रमुख लाभ:

  • पानी की खपत में उल्लेखनीय कमी।
  • मिट्टी की उर्वरता में सुधार।
  • उत्पादन लागत में कमी।
  • पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा।

यही कारण है कि मरूभूमि में खजूर की खेती किसानों के लिए नया विकल्प बन रही है।

किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रही खेती

  • मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण का यह मॉडल भविष्य की जरूरत है।
  • उन्होंने बताया कि कम पानी वाले क्षेत्रों में भी बागवानी को बढ़ावा दिया जा सकता है।
  • उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों से इस मॉडल का अध्ययन करने को कहा।
  • साथ ही, स्थानीय किसानों को भी इस सफल प्रयोग से सीख लेने की सलाह दी।

यह भी पढ़ें:

  • [प्राकृतिक खेती से किसानों की आय कैसे बढ़ रही है]
  • [ड्रिप सिंचाई के फायदे और सरकारी योजनाएं]
  • [राजस्थान में बागवानी फसलों का बढ़ता रकबा]

मरूभूमि में खजूर की खेती बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

  • विशेषज्ञों का मानना है कि मरूभूमि में खजूर की खेती भविष्य की लाभकारी खेती बन सकती है।
  • कम पानी, कम लागत और बेहतर बाजार मांग इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं।
  • ऐसे सफल मॉडल न केवल किसानों की आय बढ़ाते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करते हैं।
  • यही वजह है कि पाली के इस किसान की कहानी अब पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

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ICAR-CIAH Bikaner

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