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अनिश्चितता से समृद्धि तक, कमल सिंह उनियाल ने कैसे खड़ी की टिकाऊ एकीकृत कृषि की मिसाल

गांव मंच डेस्क, जयपुर

“मुश्किलें मंजिल का अंत नहीं होतीं, बल्कि अक्सर एक नई शुरुआत का रास्ता बनती हैं।” उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के द्वारीखाल विकासखंड के ग्विन छोटा गांव के प्रगतिशील किसान कमल सिंह उनियाल की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है। दृढ़ संकल्प, लगातार सीखने की इच्छा और संस्थागत सहयोग के बल पर उन्होंने एक साधारण आजीविका को सफल एकीकृत कृषि उद्यम (Integrated Farming Enterprise) में बदल दिया। आज उनकी सफलता आसपास के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

नौकरी और व्यापार में असफलता के बाद खेती को बनाया भविष्य

  • 54 वर्षीय कमल सिंह उनियाल का सफर आसान नहीं रहा।
  • उन्होंने दिल्ली की सूर्या बल्ब फैक्ट्री में नौकरी की।
  • इसके बाद बेहतर भविष्य की तलाश में कई छोटे व्यवसाय भी शुरू किए, लेकिन लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा।
  • परिस्थितियों से हार मानने के बजाय उन्होंने अपने पैतृक गांव लौटकर खेती को ही भविष्य बनाने का निर्णय लिया।
  • हालांकि, कृषि उनके लिए बिल्कुल नया क्षेत्र था। उन्होंने मार्गदर्शन के लिए कृषि विभाग से संपर्क किया।
  • उनकी सीखने की लगन को देखते हुए विभाग ने वर्ष 2015-16 में उन्हें स्टेट एग्रीकल्चरल मैनेजमेंट एंड एक्सटेंशन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (SAMETI), पंतनगर में प्रशिक्षण के लिए नामांकित किया।
  • यह प्रशिक्षण उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। यहां उन्हें वैज्ञानिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी मिली।

पारंपरिक खेती से डेयरी तक का सफल सफर

  • प्रशिक्षण के बाद उन्होंने शुरुआत में धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलें उगाईं।
  • लेकिन इनसे अपेक्षित आय नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने डेयरी व्यवसाय की संभावनाओं को पहचाना।
  • पशुपालन विभाग के सहयोग से उन्होंने चार साहीवाल नस्ल की गायें खरीदीं।
  • इस पहल ने उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव ला दिया।
  • आज उनके डेयरी फार्म में दो साहीवाल गाय, एक सिंधी गाय, एक बद्री गाय, एक जर्सी गाय और एक पहाड़ी भैंस है।
  • इनसे प्रतिदिन 20 से 25 लीटर दूध का उत्पादन होता है।
  • दूध से होने वाली नियमित आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की और उन्हें खेती में नए प्रयोग करने का आत्मविश्वास दिया।

एकीकृत खेती से सालभर होने लगी आय

  • कमल सिंह उनियाल ने धीरे-धीरे अपनी खेती का विस्तार किया।
  • उन्होंने ऑफ-सीजन सब्जियों की खेती, मत्स्य पालन और मशरूम उत्पादन को अपने कृषि मॉडल का हिस्सा बनाया।
  • उनके तालाबों में ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प और पंगासियस मछलियों का पालन किया जाता है।
  • वहीं ढिंगरी (ऑयस्टर) मशरूम की खेती भी आय का मजबूत स्रोत बन गई है।
  • इस एकीकृत कृषि मॉडल से उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया।
  • साथ ही उत्पादन जोखिम कम हुआ और पूरे वर्ष आय का स्थायी स्रोत तैयार हुआ।

SAMETI का लगातार मिला मार्गदर्शन

  • प्रशिक्षण के बाद भी SAMETI, उत्तराखंड ने उनका साथ नहीं छोड़ा।
  • समय-समय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से उन्हें नई तकनीकों की जानकारी मिलती रही।
  • “SAMETI-Uttarakhand” व्हाट्सएप समूह उनके लिए तकनीकी सलाह, समस्याओं के समाधान
  • और कृषि उत्पादों के प्रचार का प्रभावी माध्यम बना। ऑनलाइन प्रशिक्षण के जरिए भी वे आधुनिक कृषि तकनीकों से लगातार जुड़े रहे।

कई पुरस्कारों से हुआ सम्मानित

  • कमल सिंह उनियाल की मेहनत को जल्द ही पहचान मिलने लगी।
  • वर्ष 2017 में उन्हें ATMA द्वारा प्रतिष्ठित “किसान श्री” सम्मान से नवाजा गया।
  • इसके बाद मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, पौड़ी ने उन्हें “सर्वश्रेष्ठ किसान” पुरस्कार दिया।
  • सब्जी उत्पादन में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें दोबारा “किसान श्री” सम्मान मिला।
  • पशुपालन विभाग ने उनके उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए 11 पहाड़ी बकरियां भी उपलब्ध कराईं।
  • इससे उनका एकीकृत कृषि मॉडल और मजबूत हुआ।

72 हजार से बढ़कर 3.6 लाख रुपये हुई वार्षिक आय

  • कमल सिंह उनियाल की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण उनकी बढ़ती आय है।
  • वर्ष 2017 में उनकी वार्षिक आय करीब 72 हजार रुपये थी।
  • आज वे अपनी विविध कृषि गतिविधियों से करीब 3.6 लाख रुपये की शुद्ध वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं।
  • उनकी सफलता साबित करती है कि वैज्ञानिक खेती, संस्थागत सहयोग और उद्यमशील सोच से छोटी जोत भी लाभदायक
  • और टिकाऊ कृषि मॉडल में बदली जा सकती है।

ग्रामीण युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत

  • आज कमल सिंह उनियाल केवल एक सफल किसान नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरक और मार्गदर्शक भी हैं।
  • वे युवाओं को कृषि को रोजगार नहीं, बल्कि उद्यमिता का अवसर मानने के लिए प्रेरित करते हैं।
  • उनका मानना है कि आधुनिक तकनीकों और एकीकृत खेती को अपनाकर गांवों में ही बेहतर आय अर्जित की जा सकती है।
  • इससे ग्रामीण पलायन भी कम होगा और गांव आत्मनिर्भर बनेंगे।

कमल सिंह उनियाल की कहानी यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, आधुनिक ज्ञान, संस्थागत सहयोग और नवाचार के साथ खेती केवल आजीविका नहीं, बल्कि समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती है।

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

https://sameti.org.in

https://agriculture.uk.gov.in

Edited by – Riddhima

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