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जयपुर की पहचान और सुनील कोठारी का संघर्ष

गाँव मंच डेस्क, जयपुर केवल राजस्थान की राजधानी नहीं है। यह शहर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान भी है। इसकी विरासत सदियों पुरानी है। जयपुर की पहचान इसकी साझा संस्कृति से बनी है। प्रशासनिक बदलावों ने इस पहचान को लेकर बहस बढ़ाई। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में नए जिलों की घोषणा हुई।

सुनील कोठारी ने उठाई आवाज

इसी दौर में सुनील कोठारी ने जयपुर की आवाज उठाई। उन्होंने शहर की साझा विरासत का मुद्दा मजबूती से रखा। उनका विरोध केवल राजनीतिक मंच तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने सड़क से लेकर शासन सचिवालय तक अपनी बात पहुंचाई। उनका कहना था कि जयपुर की पहचान को बनाए रखना जरूरी है।

संगठन से राजनीति तक सफर

सुनील कोठारी का राजनीतिक सफर संगठन से शुरू हुआ। वे विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे। संगठन में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे प्रदेश मंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे। उन्होंने जिला अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। पार्टी के विभिन्न अभियानों में उनकी सक्रिय भूमिका रही।

मेयर पद तक पहुंचने का सफर

  • भाजपा ने सितंबर 2026 में सुनील कोठारी को जयपुर मेयर पद का प्रत्याशी बनाया।
  • वे वार्ड संख्या 112 से पार्षद हैं।
  • उनके समर्थक इस जिम्मेदारी को लंबे संघर्ष का सम्मान मान रहे हैं।
  • उनके लिए यह पद जयपुर की सेवा का नया अवसर भी है।
  • मेयर के रूप में उनके सामने कई चुनौतियां रहेंगी।

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Edited by- Riddhima

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