विदिशा। बच्चों और युवाओं में संस्कार, सेवा भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने के उद्देश्य से गुरुकुल भोपाल द्वारा संचालित संस्कारशाला अभियान मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में विस्तार पा रहा है। राष्ट्रीय मूल्य संवर्धन योजना के अंतर्गत चलाए जा रहे इस अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को छोटे-छोटे सेवा कार्यों से जोड़कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने और उसे व्यवहार में उतारने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रदेश स्तर पर अभियान को आगे बढ़ाने के साथ विदिशा जिले में भी इसकी गतिविधियों के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है।
गुरुकुल के बोर्ड सदस्य एवं राज्य समन्वय समिति से जुड़े रवि सोनी के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य केवल बच्चों को नैतिक शिक्षा देना नहीं, बल्कि उन्हें सेवा, अनुशासन, संवेदनशीलता और नेतृत्व के व्यावहारिक अवसर उपलब्ध कराना है। अभियान के माध्यम से युवाओं को ऐसी जिम्मेदारियां सौंपने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वे स्वयं सक्रिय होकर अन्य बच्चों और युवाओं को भी सेवा कार्यों से जोड़ सकें।

छह माह में 25 जिलों तक पहुंचा अभियान
- गुरुकुल भोपाल की सितंबर प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह महीनों में अभियान से 26,125 से अधिक सेवादार एवं सदस्य जुड़े हैं।
- इस अवधि में 125 से अधिक संस्कारशालाओं का नेटवर्क विकसित हुआ है।
- इसके साथ ही 100 से अधिक प्रशिक्षु आचार्य विभिन्न स्तरों पर समूहों के संचालन और नेतृत्व की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
- रिपोर्ट में 26,000 से अधिक पंजीकृत मोबाइल संपर्कों और तीन दैनिक ज्ञान-संवाद श्रृंखलाओं का भी उल्लेख किया गया है।
- संस्था का आगामी लक्ष्य 200 सक्रिय संस्कारशालाओं का नेटवर्क विकसित करना है।
- इसके लिए प्रत्येक जिले में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षु आचार्य तैयार करने, सेवा समूहों को सक्रिय रखने
- और अधिक से अधिक बच्चों एवं युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
- अभियान का उद्देश्य सेवा गतिविधियों को केवल कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों की नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाना है,
- ताकि उनमें सामाजिक जिम्मेदारी और सहयोग की भावना विकसित हो सके।
रवि सोनी ने बताया युवा नेतृत्व का महत्व
- रवि सोनी के अनुसार, समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए युवाओं को केवल प्रेरित करना पर्याप्त नहीं है,
- बल्कि उन्हें जिम्मेदारी निभाने के अवसर भी देने जरूरी हैं। संस्कारशाला अभियान में विद्यार्थी पहले स्वयं सेवा कार्यों में भाग लेता है।
- इसके बाद वह प्रशिक्षु आचार्य के रूप में अन्य विद्यार्थियों को जोड़ने
- और आगे चलकर अनुभवी प्रशिक्षु आचार्य के रूप में नए आचार्यों का मार्गदर्शन करने की भूमिका निभा सकता है।
- इस व्यवस्था के माध्यम से युवाओं में संवाद क्षमता, संगठन कौशल, आत्मविश्वास
- और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
- युवाओं को नेतृत्व के अवसर मिलने से वे अपने आसपास की समस्याओं को समझने
- और उनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास करने के लिए भी प्रेरित हो सकते हैं।
- अभियान की एक विशेषता यह है कि इसे स्थानीय समूहों और डिजिटल माध्यमों की मदद से संचालित किया जा सकता है।
- इससे बड़े भवनों या महंगे संसाधनों पर निर्भरता कम रखते हुए भी सेवा गतिविधियों को आगे बढ़ाने की संभावनाएं बनती हैं।
विदिशा में स्थानीय समूहों को सक्रिय करने की दिशा में प्रयास
- प्रदेश स्तर पर अभियान के विस्तार के साथ विदिशा जिले में भी संस्कारशालाओं
- और सेवा समूहों को मजबूत बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
- इसका उद्देश्य स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षु आचार्य के रूप में तैयार करना,
- बच्चों को नियमित सेवा गतिविधियों से जोड़ना और समाज के विभिन्न वर्गों में सहयोग की भावना विकसित करना है।
- अभियान के अंतर्गत वृद्धजनों की सहायता, जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाई में सहयोग, पशु-पक्षियों के लिए भोजन
- एवं पानी की व्यवस्था तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों को प्रोत्साहित किया जाता है।
- इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया जाता है
- कि समाजसेवा के लिए बड़े संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती। संवेदनशील सोच,
- नियमित प्रयास और दूसरों की सहायता करने की भावना से भी समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
- विदिशा में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार सेवा समूहों को सक्रिय करने
- और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि अभियान की गतिविधियों को समुदाय से जोड़ा जा सके।
सेवा, संस्कार और व्यवहार परिवर्तन पर जोर
- गुरुकुल संस्कारशाला अभियान में नैतिक शिक्षा को व्यावहारिक जीवन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
- इसके अंतर्गत रामायण के प्रसंगों के माध्यम से कर्तव्य और मर्यादा,
- भगवान बुद्ध के जीवन से करुणा एवं विवेक तथा संस्कार और भाषा से जुड़े संवादों के माध्यम से विनम्र व्यवहार की शिक्षा देने पर जोर दिया जाता है।
- इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में ऐसे मूल्यों का विकास करना है, जिन्हें वे अपने दैनिक जीवन में अपना सकें।
- दूसरों के प्रति सम्मान, जरूरतमंदों की सहायता, अनुशासन और सामाजिक सहयोग जैसे गुण बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
- रवि सोनी के अनुसार, अभियान की वास्तविक सफलता केवल सदस्यों की संख्या बढ़ने से तय नहीं होगी,
- बल्कि इस बात से तय होगी कि कितने विद्यार्थी नियमित रूप से सेवा कार्य कर रहे हैं
- और उनके व्यवहार में कितनी सकारात्मकता आ रही है। इसी दिशा में सेवा गतिविधियों की नियमितता,
- समूहों की सक्रियता और विद्यार्थियों की भागीदारी को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
200 सक्रिय संस्कारशालाओं का लक्ष्य
- गुरुकुल भोपाल की योजना आगामी चरण में 200 सक्रिय संस्कारशालाओं का नेटवर्क विकसित करने की है।
- इसके लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थानीय नेतृत्व तैयार करने, प्रशिक्षु आचार्यों को प्रोत्साहित करने
- और सेवा गतिविधियों को नियमित रूप देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
- संस्था का मानना है कि स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित नेतृत्व तैयार होने से संस्कारशालाओं का संचालन अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है।
- इसके साथ ही बच्चों और युवाओं की नियमित भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देना होगा, ताकि अभियान का प्रभाव लंबे समय तक बना रहे।
- विदिशा में भी इस पहल को स्थानीय जरूरतों और युवाओं की भागीदारी के अनुरूप आगे बढ़ाने की संभावनाएं हैं।
- स्थानीय समूहों के सक्रिय होने से सेवा गतिविधियों को अधिक लोगों तक पहुंचाने
- और सामुदायिक सहयोग को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
छोटे सेवा कार्यों से बड़े सामाजिक बदलाव की उम्मीद
- गुरुकुल संस्कारशाला अभियान का मूल संदेश है कि छोटे-छोटे सेवा कार्य जब नियमित आदत बन जाते हैं,
- तो वे समाज में बड़े सकारात्मक बदलाव का आधार बन सकते हैं।
- बच्चों और युवाओं को कम उम्र से ही सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना
- उनके व्यक्तित्व विकास के साथ समुदाय के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
- गुरुकुल भोपाल का प्रयास बच्चों और युवाओं को इसी सोच के साथ जोड़कर संस्कारयुक्त, जिम्मेदार
- और सेवाभावी समाज के निर्माण में योगदान देना है।
- अभियान के विस्तार, प्रशिक्षु आचार्यों की भूमिका और स्थानीय सेवा समूहों की सक्रियता के माध्यम से
- इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
- विदिशा में अभियान के विस्तार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से स्थानीय युवाओं को नेतृत्व
- और सेवा के अवसर उपलब्ध कराने की संभावना है। आने वाले समय में 200 सक्रिय संस्कारशालाओं का लक्ष्य कितना प्रभावी ढंग से
- हासिल होता है, यह स्थानीय भागीदारी, नियमित गतिविधियों और संगठनात्मक प्रयासों पर निर्भर करेगा।
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Edited by – Riddhima


