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राजस्थान में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाएं होंगी मजबूत, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

राजस्थान में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और आमजन को सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मातृ मृत्यु दर में कमी लाने, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) के ऑपरेशन थिएटरों को क्रियाशील बनाने, एम्बुलेंस सेवाओं को प्रभावी करने और उप स्वास्थ्य केंद्रों को आशा सहयोगिनियों से बेहतर तरीके से जोड़ने के निर्देश दिए हैं।

शासन सचिवालय में बुधवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राजस्थान स्टेट हेल्थ सोसायटी की 20वीं गवर्निंग बॉडी की बैठक आयोजित हुई। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभिम) की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही, पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों की अनुपालना पर भी चर्चा हुई।

मातृ मृत्यु दर में कमी लाना प्राथमिकता

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि मातृ मृत्यु दर में कमी लाना स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों में से एक है। इसके लिए गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर आवश्यक चिकित्सा सेवाएं और देखभाल उपलब्ध कराना जरूरी है।

उन्होंने राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं और सेवाओं का लाभ सभी पात्र एवं जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और स्वास्थ्य कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए।

सीएचसी के ऑपरेशन थिएटरों का नियमित संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश

  • मुख्य सचिव ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ऑपरेशन थिएटरों की क्रियाशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
  • उन्होंने कहा कि अधिक रोगी भार वाले चिकित्सा संस्थानों के ऑपरेशन थिएटरों को
  • मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर के रूप में उन्नत करने की दिशा में भी आवश्यक कदम उठाए जाएं।
  • उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी)
  • और उप जिला चिकित्सालयों (एसडीएच) में चिकित्सा सेवाओं का उपयोग बढ़ाने पर बल दिया।
  • इन संस्थानों में विशेषज्ञ ओपीडी, आईपीडी और शल्य चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के
  • साथ ऑपरेशन थिएटरों का नियमित संचालन भी प्राथमिकता में रखा गया।

108 एम्बुलेंस, 104 जननी एक्सप्रेस और मा वाउचर योजना पर जोर

  • बैठक में मुख्य सचिव ने 108 एम्बुलेंस और 104 जननी एक्सप्रेस सेवाओं की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
  • इन सेवाओं के बेहतर संचालन से जरूरतमंद मरीजों और गर्भवती महिलाओं तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
  • उन्होंने मा वाउचर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष ध्यान देने को कहा, ताकि पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल सके।
  • अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

उप स्वास्थ्य केंद्रों को आशा सहयोगिनियों से जोड़ने पर बल

  • मुख्य सचिव ने उप स्वास्थ्य केंद्रों और आशा सहयोगिनियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए।
  • उन्होंने कहा कि समुदाय और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच प्रभावी संपर्क होने से लोगों को आवश्यक जांच, उपचार
  • और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में सहायता मिलेगी।
  • उन्होंने टीबी मुक्त अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया।
  • इसके अतिरिक्त, यूनिसेफ के सहयोग से जनजागरूकता अभियानों और आउटरीच गतिविधियों की योजना तैयार करने के निर्देश दिए,
  • ताकि स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रति जागरूकता बढ़े और अधिक से अधिक लोग इनसे जुड़ सकें।

गर्भवती महिलाओं की जांच और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की निगरानी

  • चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री ए. राठौड़ ने
  • मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
  • उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच (एएनसी), उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं (एचआरपी) की पहचान
  • और निगरानी पर ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही, आवश्यकता के अनुसार संबंधित गर्भवती महिलाओं को
  • उपयुक्त चिकित्सा संस्थानों से जोड़ने की व्यवस्था भी की जा रही है।
  • उन्होंने विभाग की ओर से किए जा रहे विभिन्न नवाचारों की जानकारी भी बैठक में साझा की।

राजस्थान में मातृ स्वास्थ्य और टीकाकरण कार्यक्रमों की प्रगति

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति
  • और उपलब्धियों की जानकारी दी। इसमें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, टीबी उन्मूलन,
  • आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, निःशुल्क जांच सेवाओं और स्वास्थ्य अवसंरचना के विकास से जुड़े विषय शामिल रहे।
  • प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, एसआरएस 2022–24 में राजस्थान का मातृ मृत्यु अनुपात प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 87 दर्ज किया गया।
  • वित्तीय वर्ष 2026–27 में सितंबर तक 12 सप्ताह से पहले गर्भावस्था पंजीकरण का प्रतिशत 89.4 रहा,
  • जबकि चार प्रसवपूर्व जांचों का कवरेज 91.79 प्रतिशत दर्ज किया गया।
  • प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि प्रदेश में 12,478 आयुष्मान आरोग्य मंदिर क्रियाशील हैं।
  • वहीं, वर्ष 2025 में टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों की संख्या 6,547 रही।

एनएचएम के लिए 4,278 करोड़ रुपये के संसाधन प्रावधान की जानकारी

  • बैठक में वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत लगभग
  • 4,278 करोड़ रुपये के कुल संसाधन प्रावधान की जानकारी दी गई।
  • इसके साथ ही प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण
  • और सुदृढ़ीकरण की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
  • बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, चिकित्सा संस्थानों की कार्यक्षमता बढ़ाने
  • और विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित

  • राजस्थान स्टेट हेल्थ सोसायटी की गवर्निंग बॉडी की बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव जनजाति क्षेत्रीय
  • विकास कुंजी लाल मीणा, अतिरिक्त मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवासन आलोक गुप्ता,
  • अतिरिक्त मुख्य सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता दिनेश कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा
  • राजेश कुमार यादव और प्रमुख शासन सचिव जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी हेमंत कुमार गेरा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
  • बैठक में प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया, प्रमुख शासन सचिव आयुर्वेद
  • एवं भारतीय चिकित्सा सुबीर कुमार तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी सहभागिता की।

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https://rajswasthya.rajasthan.gov.in/

Edited by – Riddhima

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