नई दिल्ली। जिस पारंपरिक कृषि पद्धति को कभी सिर्फ भारतीय गांवों और छोटे किसानों की स्थानीय पहल माना जाता था, आज उसी ने वैश्विक मंच पर आधुनिक कृषि के लिए एक मिसाल पेश की है। आंध्र प्रदेश के कम्युनिटी मैनेज्ड नेचुरल फार्मिंग (APCNF) मॉडल को स्वीडन में दिए जाने वाले दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ‘फूड प्लैनेट प्राइज’ (Food Planet Prize) से सम्मानित किया गया है।
यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हर वर्ष उन अनूठे और क्रांतिकारी प्रयासों को दिया जाता है जो वैश्विक खाद्य व्यवस्था और खेती को अधिक टिकाऊ (Sustainable), सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मील का पत्थर साबित होते हैं।

रसायनों से दूरी और प्रकृति से दोस्ती: क्यों खास है APCNF मॉडल?
आंध्र प्रदेश के लाखों छोटे और सीमांत किसान पिछले कुछ वर्षों से रासायनिक खादों को छोड़कर पूरी तरह से प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। इस कृषि मॉडल की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- शून्य रासायनिक निर्भरता: इस मॉडल के तहत किसान महंगे रासायनिक उर्वरकों, यूरिया और जहरीले कीटनाशकों के बजाय पूरी तरह स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों (जैसे जीवामृत, बीजामृत और सड़ा हुआ गोबर) का इस्तेमाल करते हैं।
- लागत में भारी कमी: रसायनों पर निर्भरता खत्म होने से किसानों की इनपुट कॉस्ट (खेती की लागत) नाममात्र रह गई है, जिससे सीधे तौर पर उनकी शुद्ध आमदनी में इजाफा हुआ है।
- मिट्टी और सेहत का सुधार: प्राकृतिक घटकों के प्रयोग से भूमि की उपजाऊ क्षमता (Soil Health) वापस लौट रही है और पानी को सोखने की क्षमता में भी अभूतपूर्व सुधार देखा गया है।
वैश्विक जूरी ने क्यों चुना भारत का यह मॉडल?
फूड प्लैनेट प्राइज की अंतरराष्ट्रीय जूरी ने आंध्र प्रदेश के इस मॉडल को इसलिए चुना क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ा सामुदायिक प्राकृतिक कृषि नेटवर्क बन चुका है। जूरी ने माना कि यह पहल सिर्फ कृषि उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि:
- यह पर्यावरण संरक्षण और ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के दौर में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का मजबूती से मुकाबला करती है।
- इसने ग्रामीण समाज में महिलाओं और युवाओं को कृषि प्रबंधन में मुख्यधारा से जोड़कर आर्थिक संबल दिया है।
यही वजह है कि आज संयुक्त राष्ट्र (UN) सहित दुनिया भर के कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और नीति निर्माता भारत के इस मॉडल का अध्ययन करने आ रहे हैं।

भविष्य की कृषि का मार्गदर्शक बना भारत
“यह वैश्विक सम्मान केवल आंध्र प्रदेश की उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे भारत के अन्नदाताओं और हमारी पारंपरिक कृषि पद्धतियों के लिए एक गौरव का क्षण है। स्वीडन में मिला यह पुरस्कार पूरी दुनिया को एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत की धरती पर विकसित हो रहे ये देसी कृषि मॉडल ही भविष्य की वैश्विक खाद्य सुरक्षा और धरती को बचाने का असली रास्ता दिखा सकते हैं।” — भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के विशेषज्ञ विचार
- आंध्र प्रदेश कम्युनिटी मैनेज्ड नेचुरल फार्मिंग के तकनीकी दिशानिर्देशों, शून्य बजट प्राकृतिक खेती (ZBNF) की केस स्टडीज और प्रगतिशील किसानों के अनुभवों को जानने के लिए रैथु सादिका संस्था (RySS), आंध्र प्रदेश सरकार के आधिकारिक वेब पोर्टल पर विजिट करें।
- भारत में प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही ‘भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति’ (BPKP), राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन और मृदा स्वास्थ्य कार्ड की योजनाओं को देखने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
राजस्थान में पंचायतों, ग्राम सभाओं और ग्रामीण योजनाओं से जुड़ी ताज़ा खबरें गाँव मंच के किसान सेक्शन में भी उपलब्ध हैं।
नोट:- यह विचार लेखक पत्रकार कृशिका अग्रवाल Krishika Agarwal के है।


