गांव मंच डेस्क,पश्चिम बंगाल। पश्चिम बंगाल के सूखा प्रभावित बैंकुरा जिले की रहने वाली छबिता प्रमाणिक की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि अगर महिलाओं को सही मार्गदर्शन, तकनीक और अवसर मिलें तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज की तस्वीर बदल सकती हैं। कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी करने वाली छबिता आज एक सफल किसान, उद्यमी और हजारों महिलाओं की प्रेरणा बन चुकी हैं।
छोटी शुरुआत, बड़े सपने
छबिता प्रमाणिक ने केवल 2 एकड़ जमीन पर खेती की शुरुआत की थी। सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने पारंपरिक खेती के बजाय वैज्ञानिक खेती की तकनीकों को अपनाया और धीरे-धीरे अपनी खेती को अधिक लाभदायक बनाया।
उनके जीवन में बड़ा बदलाव तब आया जब उनका जुड़ाव कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बैंकुरा से हुआ। यहां उन्हें आधुनिक खेती, संसाधन संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, तिलहन उत्पादन, जैविक खाद निर्माण और कृषि आधारित उद्यमों की जानकारी मिली।
महिलाओं को जोड़कर बनाया मजबूत नेटवर्क
छबिता ने केवल अपने विकास तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने 10 महिलाओं के साथ एक स्वयं सहायता समूह की शुरुआत की। यह छोटा प्रयास आगे चलकर “दीहीपाड़ा मोनालिसा संघ” के रूप में विकसित हुआ, जिससे आज करीब 3,500 महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
इस समूह की महिलाओं को मशरूम उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट, ऑफ-सीजन सब्जी उत्पादन, ब्राउन राइस प्रोसेसिंग और अन्य आयवर्धक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया। इससे महिलाओं की आय बढ़ी और वे आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनीं।

छबिता प्रमाणिक के साथ बदलाव की राह पर ग्रामीण महिलाएं।
खेती से उद्यमिता तक का सफर
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत समूह को मशरूम उत्पादन इकाई, शेड नेट संरचना और ब्राउन राइस प्रोसेसिंग के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। आज उनके समूह द्वारा तैयार किया गया ब्राउन राइस पश्चिम बंगाल सरकार के रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से बाजार में बेचा जा रहा है।
इससे महिलाओं को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।
हजारों परिवारों के लिए प्रेरणा
आज छबिता प्रमाणिक हर महीने लगभग 15,000 रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। वे वर्तमान में सीनियर कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (CRP) के रूप में कार्य कर रही हैं और लगभग 500 ग्रामीण परिवारों तथा 347 स्वयं सहायता समूहों का मार्गदर्शन कर रही हैं।
उनके प्रयासों से सैकड़ों महिलाओं ने टिकाऊ खेती, सामूहिक उद्यम और स्वरोजगार को अपनाया है। यही कारण है कि ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण में उनके योगदान को देखते हुए हाल ही में उन्हें पश्चिम बंगाल के राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया।
बदलाव की मिसाल
छबिता प्रमाणिक की कहानी सिर्फ एक महिला की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि जब ग्रामीण महिलाओं को ज्ञान, तकनीक, संस्थागत सहयोग और बाजार से जोड़ने के अवसर मिलते हैं, तो वे समाज में बड़े बदलाव की अगुआ बन सकती हैं। उनका सफर आज देशभर की महिलाओं और किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।
Edited by AI


