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भारत में खरीफ 2026 में जैविक खाद की मांग 3.5 गुना बढ़ी

गांव मंच डेस्क | 09/06/2026 | भारत में खरीफ 2026 सीजन के दौरान किसानों के बीच जैविक खाद के उपयोग में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है।

केंद्र सरकार के अनुसार इस वर्ष अब तक किसानों ने 11.17 लाख टन जैविक खाद खरीदी है।

पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 3.2 लाख टन था।

इस तरह जैविक खाद की खरीद में करीब 3.5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसान अब मिट्टी की सेहत सुधारने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

जैविक खेती की ओर बढ़ रहा किसानों का भरोसा

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने बताया कि जैविक खाद की मांग में आई यह बढ़ोतरी सकारात्मक संकेत है।

उन्होंने कहा कि किसान धीरे-धीरे रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैविक विकल्पों को भी अपना रहे हैं।

जैविक खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती है।

इससे भूमि की जल धारण क्षमता भी बेहतर होती है।

लंबे समय में यह खेती की लागत कम करने और उत्पादन को टिकाऊ बनाने में सहायक साबित हो सकती है।

खेत में फसल पर जैविक खाद का छिड़काव करता किसान, खरीफ 2026 में ऑर्गेनिक खाद की बढ़ती मांग का प्रतीक।

खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों का पर्याप्त भंडार

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर फिलहाल कोई चिंता की बात नहीं है।

कृषि विभाग ने खरीफ 2026 के लिए कुल उर्वरक आवश्यकता 383.9 लाख टन आंकी है।

इसके मुकाबले वर्तमान में 197.56 लाख टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है।

यह कुल आवश्यकता का लगभग 51 प्रतिशत है।

आमतौर पर इस समय तक लगभग 33 प्रतिशत स्टॉक उपलब्ध रहता है।

इस लिहाज से वर्तमान भंडार काफी बेहतर स्थिति में माना जा रहा है।

आयात और घरेलू उत्पादन दोनों पर जोर

सरकार के अनुसार हालिया वैश्विक चुनौतियों के बावजूद उर्वरकों का उत्पादन और आयात लगातार जारी है।

जून महीने में 25 लाख टन से अधिक आयातित यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं।

इसके अलावा 17 लाख टन यूरिया के आयात की प्रक्रिया भी जारी है।

वर्ष 2025 में देश की लगभग 73 प्रतिशत उर्वरक आवश्यकता घरेलू उत्पादन से पूरी की गई थी।

यूरिया उत्पादन भी लगातार बढ़ा है।

वर्ष 2014-15 में देश का यूरिया उत्पादन 225 लाख टन था।

यह बढ़कर 2024-25 में 306.67 लाख टन तक पहुंच गया।

किसानों को मिल रही सब्सिडी का लाभ

सरकार ने बताया कि उर्वरक सब्सिडी के सभी बिल समय पर जारी किए जा रहे हैं।

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उर्वरक सब्सिडी का बजट 1.71 लाख करोड़ रुपये रखा गया है।

फिलहाल नीम-कोटेड यूरिया का अधिकतम खुदरा मूल्य 45 किलोग्राम बैग के लिए 242 रुपये है।

डीएपी का 50 किलोग्राम बैग 1,350 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।

किसानों के लिए क्या है संकेत?

जैविक खाद की बढ़ती मांग यह दिखाती है कि देश के किसान अब टिकाऊ और संतुलित खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

साथ ही सरकार का दावा है कि खरीफ सीजन में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है।

ऐसे में किसानों को समय पर खाद मिलने और बेहतर फसल उत्पादन की उम्मीद बढ़ गई है।

Department of Agriculture & Farmers Welfare
Soil Health Card Scheme

Riddhima

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