गांवमंच डेस्क, जखराना गांव की बेटी डॉ. संगीता यादव ने हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़ में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यभार संभालकर बहरोड़ क्षेत्र और यादव समाज का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि के बाद उनके पैतृक गांव जखराना सहित पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली डॉ. यादव की सफलता क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है।

शोध और नवाचार के क्षेत्र में भी हासिल की बड़ी उपलब्धि
- हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति से
- पहले डॉ. संगीता यादव ने शोध और नवाचार के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की थी।
- करीब एक वर्ष पहले उन्हें भारत सरकार की ओर से प्रतिष्ठित
- बायोटेक्नोलॉजी इग्निशन ग्रांट (BIG) के तहत 50 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई थी।
- यह अनुदान उनके उच्च प्रभाव वाले शोध और नवाचार की संभावनाओं को मान्यता देने वाला महत्वपूर्ण सम्मान है।
- उनकी यह उपलब्धि बताती है कि ग्रामीण परिवेश से आने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थी भी अवसर और निरंतर मेहनत के बल पर राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
सरकारी स्कूल से IIT बॉम्बे और स्वीडन तक का सफर
- डॉ. संगीता यादव का शैक्षणिक सफर जखराना गांव के सरकारी विद्यालय से शुरू हुआ।
- उन्होंने कक्षा 1 से 12वीं तक की शिक्षा सरकारी स्कूलों से पूरी की।
- इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए प्रतिष्ठित IIT बॉम्बे से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
- पीएचडी के बाद उन्होंने स्वीडन की उप्पसाला यूनिवर्सिटी में पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च पूरी की।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध का अनुभव हासिल करने के बाद अब हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में उनकी नियुक्ति शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उनके अनुभव को नई दिशा देगी।
परिवार में भी शिक्षा और लोक सेवा की मजबूत परंपरा
- डॉ. संगीता यादव की सफलता के पीछे उनके परिवार की शिक्षा और लोक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता भी महत्वपूर्ण रही है।
- उनके पिता श्री सूबे सिंह यादव राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य के पद पर सेवाएं दे चुके हैं।
- उनके बड़े भाई दिनेश यादव राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, लुहाडेरा में सेवाएं दे रहे हैं।
- वहीं उनकी छोटी बहन मनीषा यादव नगर पालिका आयुक्त, तिजारा के पद पर कार्यरत हैं।
- परिवार की इस पृष्ठभूमि ने शिक्षा, सेवा और जिम्मेदारी के मूल्यों को मजबूत किया है।
माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय
- अपनी सफलता पर डॉ. संगीता यादव ने अपने माता-पिता के योगदान को विशेष रूप से याद किया।
- उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि उनके माता-पिता की भी है।
- उनके अनुसार, माता-पिता ने विपरीत परिस्थितियों और सामाजिक दबावों
- के बावजूद उनकी शिक्षा तथा करियर की आकांक्षाओं का समर्थन किया। उनके अटूट विश्वास ने इस सफर को संभव बनाया।
ग्रामीण बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा
- डॉ. संगीता यादव की उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं है,
- बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा और शोध के प्रति बढ़ते अवसरों का उदाहरण भी है।
- जखराना जैसे गांव से निकलकर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने के बाद
- IIT बॉम्बे से पीएचडी, स्वीडन में पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च और
- अब केंद्रीय विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर का पद हासिल करना उनकी मेहनत और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
उनकी सफलता से जखराना और बहरोड़ क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के माध्यम से अत्याधुनिक शोध और वैश्विक अकादमिक अनुभव को विद्यार्थियों तक पहुंचाने की उनकी भूमिका नई पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। डॉ. संगीता यादव का सफर विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखती हैं।
अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
Edited by – Riddhima


