गांव मंच डेस्क, देश की कृषि व्यवस्था पर मौसम की मार बढ़ती दिखाई दे रही है। कमजोर मानसून ने खरीफ फसलों की संभावनाओं को प्रभावित किया है। अब अल नीनो के कारण रबी फसलों पर भी संकट मंडरा रहा है। इससे वित्त वर्ष 2026-27 में कृषि क्षेत्र की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
अल नीनो और कमजोर मानसून से बढ़ी चिंता
इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून में सामान्य से 13 प्रतिशत कम बारिश हुई। कई क्षेत्रों में बारिश की कमी 40 से 60 प्रतिशत तक रही। इसका असर धान, दलहन और तिलहन जैसी फसलों पर पड़ा है। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की वृद्धि दर भी धीमी हुई है। पहली तिमाही में यह दर 3.6 प्रतिशत रही।

- सरकार ने रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किए हैं।
- हालांकि, गेहूं के MSP में केवल 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई।
- किसान संगठनों और कृषि विशेषज्ञों के लिए आय सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
- भारत की 46 प्रतिशत से अधिक कार्यशक्ति कृषि पर निर्भर है।
रबी फसलों और गेहूं उत्पादन पर खतरा
अल नीनो का प्रभाव फरवरी 2027 तक बने रहने की आशंका है। इससे सर्दियों में बारिश कम होने का जोखिम बढ़ा है। कम बारिश का असर गेहूं उत्पादन पर भी पड़ सकता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में पानी की कमी से बुवाई प्रभावित होने की चिंता है। इससे किसानों की आय पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।
Edited by- Riddhima


