Gaonmanch

यूरिया संकट और जमीन अधिग्रहण के खिलाफ देशभर में किसानों का प्रदर्शन

गांव मंच डेस्क, राजस्थान देश के कई राज्यों में किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। किसान संगठनों, विशेषकर All India Kisan Mazdoor Morcha (AIKMM) ने देशव्यापी धरना-प्रदर्शन, रैलियों और पुतला दहन कार्यक्रमों का ऐलान किया है। किसानों का कहना है कि खेती से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकारें उनकी बात नहीं सुन रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

यूरिया की कमी से बढ़ी किसानों की चिंता

किसानों का सबसे बड़ा आरोप कई इलाकों में यूरिया की कमी को लेकर है। उनका कहना है कि समय पर खाद नहीं मिलने से फसलों की वृद्धि प्रभावित हो रही है। कई जगह किसानों को लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है, जबकि कुछ क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार यूरिया उपलब्ध ही नहीं है। किसान संगठनों का कहना है कि खरीफ और अन्य फसलों के लिए समय पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

महंगे डीजल से बढ़ रही खेती की लागत

यूरिया की कमी प्रदर्शन कर रहे किसानों ने डीजल की बढ़ती कीमतों को भी बड़ा मुद्दा बताया है। खेतों की जुताई, सिंचाई और कृषि मशीनों के संचालन में डीजल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में ईंधन की बढ़ती कीमतों से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।

जमीन अधिग्रहण पर भी उठे सवाल

कई किसान संगठनों ने राज्य सरकारों द्वारा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाओं पर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों की जमीन बिना पर्याप्त सहमति और उचित मुआवजे के अधिग्रहित की जा रही है। प्रदर्शनकारी किसानों ने मांग की है कि किसी भी भूमि अधिग्रहण से पहले किसानों की सहमति को अनिवार्य बनाया जाए और प्रभावित परिवारों को न्यायसंगत मुआवजा दिया जाए।किसान नेताओं का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जा सकता है। देशभर में हो रहे ये प्रदर्शन एक बार फिर कृषि क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों और किसानों की बढ़ती चिंताओं को सामने ला रहे हैं।

Edited by- Krishika Agarwal





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