गांव मंच डेस्क, नई दिल्ली | गेहूं की कटाई के बाद किसान की सबसे बड़ी चिंता होती है कि उसकी फसल सही दाम पर बिके। इस बार देश के लाखों किसानों के लिए राहत भरी खबर आई है।
सरकार ने इस साल 3.5 करोड़ टन गेहूं खरीदा है। यह पिछले साल की तुलना में 17 प्रतिशत ज्यादा है। खास बात यह है कि खरीद का यह आंकड़ा सरकार के तय लक्ष्य से भी आगे निकल गया है।
इस बढ़ी हुई खरीद का सीधा फायदा किसानों को मिला है। अधिक किसानों को अपनी फसल MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने का मौका मिला।
आखिर यह खबर किसानों के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
जब सरकारी खरीद बढ़ती है, तो किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ता।
उन्हें बाजार में कम कीमत मिलने का डर भी कम रहता है। यही वजह है कि सरकारी खरीद को किसानों की आय से सीधे जुड़ा माना जाता है।
इस साल के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि किसानों का सरकारी खरीद व्यवस्था पर भरोसा बढ़ रहा है।
FCI क्या करता है?
देश में गेहूं की खरीद मुख्य रूप से भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य एजेंसियां करती हैं।
FCI किसानों से MSP पर गेहूं खरीदता है। इसके बाद यही अनाज सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सरकारी योजनाओं के लिए इस्तेमाल होता है।
सरल शब्दों में कहें तो FCI किसानों और देश की खाद्य सुरक्षा के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करता है।
किस राज्य ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया?
इस बार भी पंजाब गेहूं खरीद में सबसे आगे रहा।
राज्य से 1.21 करोड़ टन गेहूं खरीदा गया।
लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा मध्य प्रदेश की हो रही है। यहां खरीद 78 लाख टन से बढ़कर 1.04 करोड़ टन पहुंच गई। यानी करीब 26 लाख टन की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
हरियाणा में खरीद 70 लाख टन से बढ़कर 81 लाख टन हो गई।
उत्तर प्रदेश ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। यहां खरीद 10 लाख टन से बढ़कर 17 लाख टन पहुंच गई।
राजस्थान में भी खरीद 19 लाख टन से बढ़कर 24 लाख टन हो गई।
ये आंकड़े बताते हैं कि अब सरकारी खरीद का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
किसानों को क्या फायदा होगा ?
- MSP का लाभ ज्यादा किसानों तक पहुंचा
इस बार बड़ी संख्या में किसानों ने अपनी फसल MSP पर बेची।
इससे उन्हें बाजार की अनिश्चितता से राहत मिली।
- भुगतान प्रक्रिया हुई आसान
डिजिटल भुगतान के कारण किसानों के खातों में सीधे पैसे पहुंच रहे हैं।
इससे पारदर्शिता बढ़ी है और भुगतान में देरी कम हुई है।
- अगली फसल के लिए बढ़ा भरोसा
जब किसान को फसल का अच्छा दाम मिलता है, तो वह अगली फसल में बेहतर निवेश कर सकता है।
इससे उत्पादन बढ़ाने और नई तकनीक अपनाने का रास्ता खुलता है।
किसानों के लिए इसका क्या संदेश है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि MSP पर मजबूत खरीद व्यवस्था खेती को अधिक सुरक्षित बनाती है।
इससे किसान उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित होते हैं। साथ ही खेती को लेकर उनका आत्मविश्वास भी मजबूत होता है।
यह सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है
3.5 करोड़ टन गेहूं खरीद का आंकड़ा सुनने में एक रिकॉर्ड जैसा लगता है।
लेकिन इसके पीछे लाखों किसान परिवारों की मेहनत छिपी है।
हर बोरी गेहूं के साथ एक किसान की उम्मीद जुड़ी होती है। इस साल बढ़ी हुई सरकारी खरीद ने उन उम्मीदों को और मजबूत किया है।
यही वजह है कि गेहूं खरीद में 17 प्रतिशत की यह बढ़ोतरी सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि किसानों के बढ़ते भरोसे की कहानी भी है।


