गांवमंच डेस्क | जयपुर
राजस्थान में इस वर्ष कमजोर और असमान मानसून का असर अब कृषि क्षेत्र में साफ दिखाई देने लगा है। खरीफ सीजन की अंतिम दौर की बुवाई के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक लक्ष्य से 26.62 लाख हेक्टेयर कम बुवाई हुई है। सबसे अधिक प्रभावित तिलहन और दलहन फसलें रही हैं, जिससे आने वाले महीनों में दाल और खाद्य तेल की कीमतों में तेजी की आशंका बढ़ गई है।
कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार कई जिलों में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसान समय पर बुवाई नहीं कर सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगस्त में भी सामान्य बारिश नहीं हुई, तो उत्पादन पर और अधिक दबाव पड़ सकता है।

लक्ष्य से काफी पीछे रही खरीफ बुवाई
प्रदेश में खरीफ फसलों के लिए निर्धारित लक्ष्य की तुलना में बुवाई का क्षेत्र काफी कम रहा है। विशेष रूप से तिलहन और दलहन फसलों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
खरीफ फसलों की स्थिति
| फसल | लक्ष्य (लाख हेक्टेयर) | अब तक बुवाई | कमी |
|---|---|---|---|
| बाजरा | 62.48 | 39.09 | -37.73% |
| मूंग | 41.72 | 22.63 | -45.75% |
| उड़द | 32.00 | 22.03 | -31% |
| तिलहन | 34.83 | 27.50 | -20.89% |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बारिश की कमी ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में बुवाई को सबसे अधिक प्रभावित किया है।
दलहन की बुवाई घटने से दाल महंगी हो सकती है
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मूंग और उड़द की बुवाई में भारी गिरावट भविष्य में दालों की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती है। घरेलू उत्पादन घटने पर आयात पर निर्भरता बढ़ेगी, जिससे बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि:
- मूंग की बुवाई में लगभग 45 प्रतिशत से अधिक कमी चिंता का विषय है।
- उड़द का रकबा भी लक्ष्य से काफी नीचे है।
- अरहर और अन्य दलहन फसलों की स्थिति पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है।
तिलहन फसलें प्रभावित, खाद्य तेल बाजार पर असर संभव
तिलहन फसलों में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। सोयाबीन, तिल और अन्य तिलहन फसलों का रकबा घटने से खाद्य तेलों की घरेलू उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
भारत पहले से ही खाद्य तेलों के मामले में आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में घरेलू उत्पादन कम होने पर पाम तेल, सोया तेल और सूरजमुखी तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।
कृषि वैज्ञानिकों की चेतावनी
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि मानसून की असमानता इस बार सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई, जबकि कई इलाकों में लंबे अंतराल तक बारिश नहीं हुई।
विशेषज्ञों के अनुसार:
“यदि अगस्त के दूसरे पखवाड़े में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो दलहन और तिलहन फसलों की उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिसका असर सीधे खाद्य महंगाई पर दिखाई देगा।”
किसानों की बढ़ी चिंता
कम बारिश के कारण किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:
- दोबारा बुवाई का अतिरिक्त खर्च
- डीजल और सिंचाई लागत में बढ़ोतरी
- बीज और उर्वरक पर अतिरिक्त निवेश
- उत्पादन घटने का जोखिम
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अब अगस्त की बारिश पर निर्भर नजर आ रहे हैं।
उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा असर?
यदि उत्पादन में कमी बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में:
- दालों की खुदरा कीमतें बढ़ सकती हैं।
- खाद्य तेल महंगे हो सकते हैं।
- त्योहारों के सीजन में रसोई का बजट और बढ़ सकता है।
- होटल और खाद्य उद्योग की लागत में भी वृद्धि हो सकती है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को स्थिति से निपटने के लिए:
- दलहन और तिलहन के बफर स्टॉक मजबूत करने,
- आवश्यक होने पर समय पर आयात निर्णय लेने,
- किसानों को सूखा राहत और सिंचाई सहायता उपलब्ध कराने,
- तथा फसल बीमा दावों के शीघ्र निपटान पर ध्यान देना होगा।
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Edited by – Krishika Agarwal


