गांवमंच डेस्क | नई दिल्ली
देश में रसोई का बजट लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले पांच महीनों में खाद्य तेल, दाल, दूध और चीनी जैसी रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मूल्य निगरानी आंकड़ों के अनुसार फरवरी से अगस्त 2026 के बीच अधिकांश प्रमुख खाद्य वस्तुएं महंगी हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-इजराइल तनाव, कमजोर और असमान मानसून, तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतें इस महंगाई के प्रमुख कारण हैं। तेल दाल कीमत वृद्धि
किन वस्तुओं के दाम सबसे ज्यादा बढ़े?
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक बढ़ोतरी दालों और खाद्य तेलों में दर्ज की गई है।
| खाद्य वस्तु | फरवरी 2026 | अगस्त 2026 | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| चना दाल | ₹82.01 | ₹86.66 | +5.67% |
| अरहर दाल | ₹117.50 | ₹123.46 | +5.07% |
| उड़द दाल | ₹115.80 | ₹121.51 | +4.93% |
| मूंग दाल | ₹107.41 | ₹111.96 | +4.24% |
| मसूर दाल | ₹86.88 | ₹90.63 | +4.32% |
| सरसों तेल | ₹188.88 | ₹196.44 | +4.00% |
| सोया तेल | ₹157.12 | ₹164.19 | +4.50% |
| सूरजमुखी तेल | ₹181.26 | ₹189.42 | +4.50% |
| पाम तेल | ₹142.10 | ₹148.50 | +4.50% |
| चीनी | ₹47.08 | ₹49.33 | +4.78% |
| दूध | ₹58.00 | ₹61.00 | +1.25% |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दालों और खाद्य तेलों में तेजी ने घरेलू रसोई पर सबसे अधिक असर डाला है।

महंगाई बढ़ने की बड़ी वजह क्या है?
1. ईरान युद्ध और वैश्विक तनाव
भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव से कच्चे तेल और पाम तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे आयात लागत बढ़ गई है। तेल दाल कीमत वृद्धि
2. कमजोर मानसून
कई राज्यों में मानसून सामान्य से कमजोर या असमान रहा है। इससे खरीफ फसलों, विशेषकर दालों की बुवाई और उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है। उत्पादन घटने की आशंका से बाजार में पहले ही कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।
3. अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल महंगे
मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में उत्पादन और निर्यात से जुड़े कारकों के कारण खाद्य तेलों की वैश्विक कीमतों में तेजी बनी हुई है। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है।
दूध और चीनी भी क्यों महंगे हुए?
दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे पशु चारे की लागत, परिवहन खर्च और डेयरी संचालन की बढ़ती लागत को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
वहीं चीनी के मामले में घरेलू मांग मजबूत रहने और उत्पादन अनुमान को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कीमतों में तेजी देखी गई है।
त्योहारों के सीजन में और बढ़ सकते हैं दाम
अगस्त से रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, नवरात्र और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों का सीजन शुरू हो रहा है। इस दौरान मिठाइयों, स्नैक्स और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ती है, जिससे तेल, चीनी और दालों की मांग में और उछाल आ सकता है।
यदि वैश्विक बाजार में राहत नहीं मिली और मानसून की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
- रसोई का मासिक बजट बढ़ेगा।
- मध्यमवर्ग और निम्न आय वर्ग पर अधिक दबाव पड़ेगा।
- होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की लागत बढ़ सकती है।
- त्योहारों के दौरान मिठाई और नमकीन उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार को दालों के बफर स्टॉक, आयात प्रबंधन और मूल्य स्थिरीकरण उपायों पर तेजी से काम करना होगा। यदि खरीफ उत्पादन सामान्य रहता है, तो वर्ष के अंत तक कुछ राहत मिल सकती है।
पिछले पांच महीनों में तेल, दाल, दूध और चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि खाद्य महंगाई अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां, कमजोर मानसून और आयात पर निर्भरता ने मिलकर बाजार पर दबाव बनाया है। त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने से आने वाले हफ्तों में कीमतों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
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Edited by – Riddhima


