गांव मंच डेस्क। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कपकोट ब्लॉक स्थित कपकोट गांव की रहने वाली 36 वर्षीय ममता मेहता की कहानी संघर्ष, आत्मविश्वास और मेहनत की ऐसी मिसाल है, जो हजारों ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। पति स्वर्गीय जमान सिंह के असामयिक निधन के बाद उनके सामने परिवार का पालन-पोषण और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया था। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बीच उन्होंने हार मानने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना और आज वे सफल महिला किसान, उद्यमी और मास्टर ट्रेनर के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
कृषि विभाग के सहयोग से बदली जिंदगी
- साल 2017 में ममता मेहता का संपर्क कृषि विभाग से हुआ।
- विभाग ने उनके खेत पर वैज्ञानिक खेती के प्रदर्शन आयोजित किए और
- उन्हें विभिन्न कृषि विस्तार कार्यक्रमों से जोड़ा। इन प्रयासों ने उन्हें आधुनिक कृषि
- तकनीकों की जानकारी दी और खेती को आय का मजबूत माध्यम बनाने का आत्मविश्वास दिया।
इसके बाद राज्य कृषि प्रबंधन एवं प्रसार प्रशिक्षण संस्थान (SAMETI), उत्तराखंड तथा गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GBPUAT), पंतनगर के सहयोग से उन्हें समय-समय पर कृषि प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने उनकी तकनीकी जानकारी और उद्यमिता कौशल को नई दिशा दी।

मशरूम उत्पादन बना सफलता की पहली सीढ़ी
- रोजगार के नए अवसर तलाशते हुए ममता मेहता ने उद्यान विभाग के प्रोत्साहन से मशरूम उत्पादन शुरू किया।
- शुरुआती दौर में तकनीकी जानकारी की कमी के कारण उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
- बाद में SAMETI द्वारा आयोजित विशेष मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण में भाग लेने के बाद उन्होंने
- वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन करना सीखा।
- प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का परिणाम यह हुआ कि उनकी उत्पादन क्षमता
- और आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उन्होंने लगातार विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर अपने ज्ञान
- और कौशल को और मजबूत किया।
डेयरी फार्मिंग से बढ़ाई आय
मशरूम उत्पादन में सफलता मिलने के बाद ममता मेहता ने डेयरी फार्मिंग को भी अपने व्यवसाय का हिस्सा बनाया। इससे उन्होंने एकीकृत कृषि प्रणाली विकसित की, जिससे आय के कई स्रोत तैयार हुए और उनकी आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत होती गई।
आज हैं सफल उद्यमी और मास्टर ट्रेनर
- लगातार सीखने और नई तकनीकों को अपनाने की बदौलत ममता मेहता आज एक सफल ग्रामीण उद्यमी बन चुकी हैं।
- वे केवल खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मास्टर ट्रेनर के रूप में अन्य किसानों
- और महिलाओं को भी मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देती हैं।
- उन्होंने महिला पुलिस कर्मियों को भी मशरूम उत्पादन का व्यावहारिक प्रशिक्षण
- देकर कृषि के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया।
कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से हुई सम्मानित
- ममता मेहता के उत्कृष्ट कार्यों को विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थाओं ने सम्मानित किया है।
- उन्हें एसएसपी अल्मोड़ा द्वारा प्रशंसा पत्र प्रदान किया गया।
- इसके अलावा उन्हें ‘किसान श्री’ और ‘किसान भूषण’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मान भी मिले।
- सामाजिक सेवा में योगदान के लिए उन्हें नैनीताल जिले में आयोजित
- दानपुर महोत्सव के दौरान महिला सामाजिक कार्य के लिए ‘दानपुर रत्न सम्मान’ से भी नवाजा गया।
पांच बैग से शुरू हुआ सफर, आज एक टन उत्पादन
- जिस सफर की शुरुआत केवल पांच मशरूम बैग से हुई थी,
- आज वह बढ़कर एक टन उत्पादन क्षमता तक पहुंच चुका है।
- उनका उद्यम अब केवल उनकी आजीविका का साधन नहीं रहा,
- बल्कि कई अन्य किसानों को भी रोजगार और मशरूम उत्पादन से जुड़ने की प्रेरणा दे रहा है।
अब ग्रामीण पर्यटन की ओर बढ़ाए कदम
ममता मेहता अब उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के लिए होमस्टे शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। उनका उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना, अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करना और उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और आतिथ्य से पर्यटकों को परिचित कराना है।
6 हजार रुपये से बढ़कर 4.5 लाख रुपये सालाना आय
साल 2017 में जहां उनकी वार्षिक आय केवल 6,000 रुपये थी, वहीं आज मशरूम उत्पादन, डेयरी और एकीकृत खेती के जरिए उनकी शुद्ध वार्षिक आय लगभग 4.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है। इस आय से वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा रही हैं और खेती में आधुनिक संसाधनों का उपयोग कर रही हैं।
संघर्ष, सीख और आत्मविश्वास की मिसाल
ममता मेहता की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि कठिन परिश्रम के साथ सही मार्गदर्शन, वैज्ञानिक तकनीक और संस्थागत सहयोग मिल जाए तो विपरीत परिस्थितियों को भी अवसर में बदला जा सकता है। आज वे हजारों ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं और यह संदेश देती हैं कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर सीखने की लगन और मेहनत किसी भी व्यक्ति को सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
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Edited by – Riddhima


