गाँव मंच डेस्क, भारतीय रिजर्व बैंक ने अगस्त 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में महत्वपूर्ण फैसला लिया है। RBI Repo Rate 2026 के तहत रेपो रेट को 5.50 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। इस निर्णय का असर होम लोन, वाहन ऋण, EMI और बैंकिंग सेक्टर पर देखने को मिल सकता है। आरबीआई का यह कदम महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रेपो रेट स्थिर रहने का क्या मतलब है?
- रेपो रेट वह ब्याज दर होती है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से अल्पकालिक कर्ज लेते हैं। जब यह दर स्थिर रहती है, तब बैंकों की उधारी लागत में तुरंत बदलाव नहीं होता।
- इससे बैंक अपनी मौजूदा ब्याज दरों को बनाए रख सकते हैं।
- RBI Repo Rate 2026 के इस फैसले से होम लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्जधारकों को फिलहाल राहत मिलने की संभावना है।

महंगाई और आर्थिक विकास पर असर
- आरबीआई ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि महंगाई पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।
- खाद्य वस्तुओं की कीमतों, वैश्विक बाजार की परिस्थितियों और घरेलू मांग को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
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Edited by- Riddhima


