गांवमंच डेस्क
जयपुर। प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और उद्यमियों के लिए कारोबारी माहौल को आसान बनाने की दिशा में राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (रीको) ने बड़ा कदम उठाया है। रीको ने रीको डिस्पोजल ऑफ लैंड रूल्स, 1979 के नियम 21 और नियम 3(एजे) में आंशिक संशोधन किया है। इसके तहत ऐसे औद्योगिक क्षेत्रों में भूखंड आवंटित होने पर उद्यमियों को राहत मिलेगी, जहां अभी आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

विकसित होने तक समय सीमा में मिलेगी राहत
- संशोधित नियमों के अनुसार, यदि किसी उद्यमी को ऐसे औद्योगिक क्षेत्र में भूखंड आवंटित किया जाता है,
- जो अभी विकसित घोषित नहीं हुआ है, तो परियोजना के विभिन्न मध्यवर्ती चरणों को पूरा करने
- और इकाई को वाणिज्यिक उत्पादन में लाने की निर्धारित समय सीमा में राहत दी जाएगी।
- यह राहत औद्योगिक क्षेत्र के विकसित घोषित होने की तारीख से एक वर्ष तक उपलब्ध होगी।
- यानी आधारभूत सुविधाओं के अभाव में परियोजना प्रभावित होने की स्थिति में उद्यमी को अतिरिक्त व्यावहारिक समय मिल सकेगा।
पहले क्या थी व्यवस्था?
- वर्तमान व्यवस्था के तहत ई-नीलामी अथवा प्रत्यक्ष आवंटन योजना-2025 के अंतर्गत भूखंड
- आवंटित होने के बाद एक महीने के भीतर कब्जा प्राप्त करना आवश्यक था।
- निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं लेने पर इसे डीम्ड पजेशन माना जाता था और इसके बाद भूखंड पर निर्माण पूरा करने तथा
- वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने की समय सीमा की गणना शुरू हो जाती थी।
- ऐसे में कई बार औद्योगिक क्षेत्र में अप्रोच रोड, आंतरिक सड़क और बिजली जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने
- के बावजूद उद्यमियों पर निर्धारित समय सीमा में परियोजना पूरी करने का दबाव रहता था।
पर्यावरणीय स्वीकृति के आधार पर तय थी समय सीमा
- जिन औद्योगिक परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है,
- उनके लिए वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने की अवधि दो वर्ष निर्धारित है।
- वहीं पर्यावरणीय स्वीकृति आवश्यक होने वाली परियोजनाओं के लिए यह अवधि तीन वर्ष है।
- निर्धारित मध्यवर्ती चरणों को समय पर पूरा नहीं करने पर पेनल्टी का भी प्रावधान था।
- उद्यमियों का कहना था कि आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में
- इन समय सीमाओं के भीतर परियोजना को पूरा करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल होता है।
उद्यमियों की मांग के बाद नियमों में बदलाव
- रीको को उद्यमियों की ओर से लगातार इस समस्या से अवगत कराया गया। उद्यमियों ने मांग की थी
- कि औद्योगिक क्षेत्र के विकसित घोषित होने के बाद परियोजना को पूरा करने
- और वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
- इन व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए रीको ने नियमों में संशोधन किया है।
अब इस तरह मिलेगी समय सीमा की राहत
- संशोधित प्रावधानों के अनुसार, जिन परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है,
- उन्हें भूखंड आवंटन की तारीख से दो वर्ष या औद्योगिक क्षेत्र के विकसित घोषित होने की तारीख से एक वर्ष,
- जो भी बाद में हो, के भीतर वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करना होगा।
- इसी तरह, पर्यावरणीय स्वीकृति आवश्यक वाली परियोजनाओं के लिए वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने की
- समय सीमा भूखंड आवंटन की तारीख से तीन वर्ष या औद्योगिक क्षेत्र के विकसित घोषित
- होने की तारीख से एक वर्ष, जो भी बाद में हो, निर्धारित की गई है।
- यह संशोधित प्रावधान प्रत्यक्ष आवंटन योजना के लागू होने की तिथि से प्रभावी होंगे।
पहले लग चुकी पेनल्टी भी हो सकेगी समायोजित
- रीको के इस संशोधन में पहले से आवंटित भूखंडों को भी राहत दी गई है। रीको औद्योगिक भूखंड समय
- यदि किसी आवंटित भूखंड पर मध्यवर्ती अनुक्रमों की पालना नहीं होने के कारण पेनल्टी लगाई जा चुकी है,
- तो उसे नियमों के प्रावधानों के तहत अग्रिम बकाया शुल्कों में समायोजित किया जा सकेगा।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगा बढ़ावा
- रीको का यह फैसला राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- नियमों में बदलाव से औद्योगिक भूखंडों के उपयोग और वाणिज्यिक उत्पादन
- शुरू करने की समय सीमा अधिक व्यावहारिक और परिस्थितियों के अनुरूप होगी।
- इससे आधारभूत सुविधाओं के विकास में देरी के कारण प्रभावित होने वाली औद्योगिक परियोजनाओं को राहत मिलेगी।
- साथ ही परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने, औद्योगिक भूखंडों के बेहतर उपयोग
- और राज्य में निवेश तथा रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। रीको औद्योगिक भूखंड समय
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https://riico.rajasthan.gov.in/
Edited by – Riddhima


