जयपुर। यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट (UEM), जयपुर में 30 अक्टूबर को तीसरे इंटरनेशनल इंडस्ट्री इंस्टीट्यूशन मीट (IIM) सिनर्जी समिट-2026 का आयोजन हुआ। इसमें डिजिटल फाइनेंस, बैंकिंग सेवाओं और जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य पर चर्चा की गई। समिट का आयोजन यूनाइटेड नेशंस ग्लोबल एक्सीलेंस सेंटर के सहयोग से हुआ। इसकी थीम ‘AI के युग में मानवीय बढ़त: मूल्य क्यों मायने रखते हैं और क्या कभी स्वचालित नहीं होना चाहिए’ रखी गई।

डिजिटल बैंकिंग और साइबर सुरक्षा पर हुई चर्चा
- समिट में दो प्रमुख पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। पहली चर्चा का विषय डिजिटल भुगतान,
- AI आधारित बैंकिंग सेवाएं, साइबर सुरक्षा और भविष्य की बैंकिंग व्यवस्था रहा।
- इसमें विशेषज्ञों ने डिजिटल पेमेंट की बढ़ती भूमिका और बैंकिंग क्षेत्र में तकनीकी बदलावों पर विचार रखे।
- वक्ताओं ने कहा कि बैंकिंग सेवाओं में AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
- ऐसे में ग्राहकों की सुरक्षा, डिजिटल लेनदेन की विश्वसनीयता और मानवीय निगरानी को प्राथमिकता देना जरूरी है।
बैंकिंग में AI के लिए जरूरी है लक्ष्मण रेखा मॉडल
- समिट में ऑल राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक एम्प्लॉईज यूनियन के प्रांतीय महासचिव
- और सहायक महाप्रबंधक (सेवानिवृत्त) सूरज भान सिंह आमेरा ने बैंकिंग क्षेत्र में नियंत्रित AI के उपयोग पर महत्वपूर्ण विचार रखे।
- आमेरा ने कहा कि बैंकिंग में AI को सहयोगी उपकरण के रूप में अपनाना चाहिए, न कि बैंक मैनेजर के विकल्प के रूप में।
- AI प्रोसेसिंग का काम करे, लेकिन अंतिम निर्णय बैंक कर्मचारी ही लें।
- उन्होंने बैंकिंग में AI के लिए ‘लक्ष्मण रेखा’ मॉडल प्रस्तुत किया।
- उन्होंने तकनीक के उपयोग में मानवीय गरिमा और ग्राहकों के विश्वास को सर्वोपरि बताया।
- उनके अनुसार, विश्वास कायम करने की जिम्मेदारी इंसानों की ही रहनी चाहिए।
- उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के फ्री-एआई सिद्धांत के संदर्भ में ह्यूमन-इन-द-लूप व्यवस्था को भी अनिवार्य बताया।
- आमेरा ने कहा, “निजी बैंक AI से तेज सेवा देता है, सहकारी बैंक इंसान से अपनापन देता है।
- हमें मानवीय मॉडल चाहिए।” उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन जरूरी है।
AI के दौर में मानवीय मूल्यों और नैतिकता पर मंथन
- दूसरी पैनल चर्चा में AI के दौर में मानवीय संवेदनाओं, नैतिकता, विवेक, सामाजिक जिम्मेदारी
- और गुणवत्तापूर्ण प्रबंधन पर विचार-विमर्श हुआ।
- इसका आयोजन क्वालिटी सर्कल फोरम ऑफ इंडिया (QCFI) के सहयोग से किया गया।
- इस चर्चा में संगठनात्मक उत्कृष्टता और मानवीय मूल्यों की भूमिका पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
- पैनल का संचालन प्रो. (डॉ.) बी.के. शर्मा ने किया। वे AICTE के यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यूज के क्षेत्रीय समन्वयक हैं।
- पैनल में प्रो. एच.डी. चारण, मेजर जनरल पी.एस. राठौड़, राजेन्द्र सिंह शेखावत,
- सूरज भान सिंह आमेरा और डॉ. अल्का स्वामी शामिल रहे।
- विशेषज्ञों ने तकनीकी विकास के साथ नैतिक जिम्मेदारी और मानवीय विवेक बनाए रखने पर जोर दिया।
विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ रहे मौजूद
- समिट में राज्य सरकार के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय के संयुक्त सचिव एस.आर. मीणा उपस्थित रहे।
- UEM विश्वविद्यालय की कुलाधिपति प्रो. बनानी चक्रवर्ती और कुलपति प्रो. विश्वजॉय चटर्जी ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
- कार्यक्रम की सहयोगी संयोजक प्रो. डॉ. प्रीति शर्मा रहीं। वे प्रबंधन विभाग की सह-अधिष्ठाता हैं।
- समिट में शिक्षा जगत, बैंकिंग क्षेत्र और विभिन्न संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।
- इस आयोजन ने डिजिटल बैंकिंग और AI के बढ़ते प्रभाव के बीच मानवीय मूल्यों की आवश्यकता को रेखांकित किया।
- विशेषज्ञों ने माना कि भविष्य की तकनीक तभी उपयोगी होगी, जब उसमें नैतिकता,
- जवाबदेही और मानवीय संवेदनाओं का संतुलन बना रहेगा।
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Edited by – Krishika Agarwal


