गांवमंच डेस्क, खेती में बेहतर उत्पादन के लिए किसान कई तरह के उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं। इसी बीच एक आम धारणा लंबे समय से सुनने को मिलती है कि फसल में जितनी ज्यादा खाद डाली जाएगी, पैदावार उतनी ही ज्यादा होगी। लेकिन क्या वाकई ऐसा है? इस दावे को वैज्ञानिक नजरिए से समझना जरूरी है।
दावा: ज्यादा खाद यानी ज्यादा उत्पादन
फैक्ट चेक: भ्रामक।
- किसी फसल की पैदावार केवल खाद की मात्रा पर निर्भर नहीं करती।
- पौधों को नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और अन्य पोषक तत्वों की जरूरत होती है,
- लेकिन इनका संतुलित मात्रा में मिलना जरूरी है। जरूरत से अधिक उर्वरक डालने से उत्पादन अपने आप उसी अनुपात में नहीं बढ़ता।
- फसल की पैदावार पर मिट्टी की गुणवत्ता, पानी की उपलब्धता, बीज की किस्म, मौसम,
- कीट नियंत्रण और पोषक तत्वों का संतुलन जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।
- इसलिए ज्यादा खाद को अधिक उत्पादन की सीधी गारंटी मानना सही नहीं है।

जरूरत से ज्यादा खाद क्यों हो सकती है नुकसानदायक?
- उर्वरकों का अत्यधिक या असंतुलित इस्तेमाल मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बिगाड़ सकता है।
- इससे मिट्टी की सेहत प्रभावित हो सकती है और लंबे समय में खेती की उत्पादकता पर भी असर पड़ सकता है।
- यही वजह है कि कृषि विशेषज्ञ मिट्टी की जरूरत को समझकर उर्वरकों के इस्तेमाल की सलाह देते हैं।
- मिट्टी की जांच के आधार पर पोषक तत्वों की जरूरत तय करना अंधाधुंध खाद डालने से बेहतर तरीका है।
सही तरीका क्या है?
- अच्छी खेती का मतलब केवल ज्यादा खाद डालना नहीं है। बेहतर परिणाम
- के लिए किसान को अपनी मिट्टी और फसल की जरूरत के अनुसार उर्वरक का इस्तेमाल करना चाहिए।
- संतुलित पोषण के साथ उचित सिंचाई, गुणवत्तापूर्ण बीज और सही कृषि तकनीक भी महत्वपूर्ण हैं।
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Edited by – Riddhima


