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वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर राजस्थान औद्योगिक विकास: बड़ा लाभ

गांव मंच, जयपुर 11 जून। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर राजस्थान में औद्योगिक विकास अब सुपरफास्ट रफ्तार से दौड़ेगा। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) का निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है। जवाहर लाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (JNPT) से दादरी तक यह कॉरिडोर फैला है। इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल लागत 1 लाख 24 हजार करोड़ रुपये है। इस विशाल कॉरिडोर की कुल लंबाई 1,506 किलोमीटर है।

इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा लाभ राजस्थान राज्य को मिलने जा रहा है। प्रोजेक्ट का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान की सीमाओं से गुजरता है।

WDFC कॉरिडोर: सामान्य रेलवे ट्रैक से कितना शक्तिशाली?

यह नया माल ढुलाई नेटवर्क आधुनिक इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है। इसकी क्षमता सामान्य ट्रैक से काफी अधिक है:

  • ट्रेन की कुल लंबाई: इस ट्रैक पर 1500 मीटर लंबी मालगाड़ियां चल सकेंगी।
  • मालगाड़ियों की रफ्तार: ट्रेनों की औसत गति 25 किमी से बढ़कर 65 किमी प्रति घंटा होगी।
  • डबल कंटेनर लोड: इस पर डबल स्टैक कंटेनर ट्रेनें आसानी से संचालित होंगी।
  • अधिकतम ऊंचाई-चौड़ाई: सुगम परिवहन के लिए इसकी ऊंचाई 7.1 मीटर रखी गई है।
राजस्थान के अजमेर में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर दौड़ती डबल स्टैक कंटेनर मालगाड़ी का दृश्य

राजस्थान के इन 5 प्रमुख जिलों से गुजरेगा कॉरिडोर

कॉरिडोर रूट के प्रमुख जिलेखुले नए टर्मिनल और क्षमतामुख्य लाभान्वित स्थानीय उद्योग
अजमेर (सराधना)गतिशक्ति मल्टी मॉडल कार्गो टर्मिनल शुरू।हर साल 1.5 मिलियन टन कार्गो हैंडलिंग होगी।
सीकर और रींगसकृषि उत्पादों के लिए टीओटी टर्मिनल।सीकर के प्रसिद्ध प्याज को देश के बाजारों में पहुंच मिलेगी।
फुलेरा, ब्यावर और सिरोहीमुख्य लॉजिस्टिक्स अवसंरचना का विकास।मार्बल, ग्रेनाइट और खनिजों का परिवहन सस्ता होगा।

अनोखी ‘रेल-पर-ट्रक’ (ToT) सेवा से बचेगा करोड़ों का डीजल

“इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी यूएसपी रेल-पर-ट्रक (ToT) सेवा है। इसके तहत माल से लदे ट्रकों को सीधे ट्रेन के फ्लैट वैगनों पर लाद दिया जाता है। इससे हाईवे पर ट्रकों की भीड़ कम होगी। जीवाश्म ईंधन की भारी बचत होगी और प्रदूषण घटेगा। उद्यमियों का माल बिना समय गंवाए बंदरगाहों तक पहुंचेगा।”

लॉजिस्टिक्स अवसंरचना रिपोर्ट, राजस्थान

दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) को मिलेगी मजबूती

इस फ्रेट कॉरिडोर के दोनों तरफ 150 किलोमीटर का विशेष प्रभाव क्षेत्र विकसित हो रहा है। इसे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के नाम से जाना जाता है। इसके तहत राजस्थान में खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र का विस्तार होगा। इसके साथ ही जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र को सीधा वैश्विक बाजार मिलेगा।

किशनगढ़ का प्रसिद्ध मार्बल अब सीधे मुंद्रा और पीपावाव बंदरगाह तक तेज गति से पहुंचेगा। इससे ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ का सपना सच होगा।

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नोट:- यह विचार लेखक पत्रकार अंकित तिवारी Ankit Tiwari के है।

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