गाँव मंच डेस्क जयपुर, 7 अप्रैल | जयपुर में आज आयकर विभाग (Income Tax Department) ने एक बड़ी नीलामी आयोजित की, जिसमें लगभग 700 ग्राम सोना, जिसमें ज्वैलरी, सिक्के और शुद्ध सोना शामिल थे, नीलाम किए गए। इनकी कुल अनुमानित कीमत 1 करोड़ 5 लाख रुपये थी। नीलामी का नेतृत्व Shri Peeyush Sonkar, I.R.S., Principal Commissioner of Income-Tax (Central), Rajasthan, Jaipur के मार्गदर्शन में हुआ, जबकि पूरी प्रक्रिया की निगरानी Shri Ram Rispal Meena, कर वसूली अधिकारी (केन्द्रीय), राजस्थान, जयपुर ने की। यह सोना उन व्यक्ति से जब्त किया गया था, जिनके ऊपर government dues pending थे। तलाशी और जब्ती के बाद यह आयकर विभाग के पास trustee की तरह सुरक्षित रखा गया था, जब तक कि बकाया राशि का निर्धारण पूरा नहीं हुआ।

नीलामी की असली वजह
नीलामी का उद्देश्य केवल सरकारी बकाया की वसूली था, न कि कोई financial gain। इस मामले में कुल pending demand 3.66 करोड़ रुपये थी, और नीलामी के जरिए लगभग 1.05 करोड़ रुपये recover किए गए, जो सीधे बकाया राशि में adjust किए जाएंगे। यह प्रक्रिया यह दिखाती है कि प्रणाली काम कर रही है, और काले धन को वैध तरीके से वसूल किया जा रहा है। इस प्रक्रिया से यह भी संदेश जाता है कि वित्तीय जिम्मेदारी और ईमानदारी समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी है। नीलामी पूरी तरह transparent और जवाबदेह रखी गई। जिन्होंने भाग लेना चाहा, उन्होंने पहले registration कराया। इसकी जानकारी अखबार और public notices के माध्यम से साझा की गई। इस बार कुल 31 bidders ने हिस्सा लिया।
नीलामी का दृश्य और विजेता
नीलामी स्थल पर सोने के आभूषण और सिक्के display किए गए। सभी registered bidders ने भाग लिया, और सबसे ऊंची बोली लगाकर जयपुर के श्रीकिशन बधाया ने इसे अपने नाम किया। पूरी प्रक्रिया fair और वैध तरीके से आयोजित की गई। किसी भी तरह की irregularity की गुंजाइश नहीं रही। यह नीलामी यह भी दिखाती है कि सरकारी बकाया वसूली और कानूनी प्रक्रिया दोनों को संतुलित तरीके से पूरा किया जा सकता है।
नीलामी से सीख
नीलामी केवल बकाया वसूली का माध्यम नहीं है। यह दिखाती है कि system में पारदर्शिता, जवाबदेही और सही procedure मौजूद हैं। Black money को market में लाना या उसे legal करना auction का उद्देश्य नहीं था। बल्कि यह सुनिश्चित किया गया कि सरकारी बकाया समय पर वसूल हो और कानून के दायरे में सुरक्षित रहे। साथ ही, यह लोगों में प्रणाली पर विश्वास बनाए रखता है और समाज को यह संदेश देता है कि ईमानदारी और वित्तीय जिम्मेदारी आवश्यक हैं।
Gaon Manch से बातचीत, नीलामी की प्रक्रिया और कानूनी पहलू
हमने Gaon Manch की तरफ से पूछा कि क्या इस तरह की नीलामी केवल तब आयोजित की जाती है जब government dues recover करना मुश्किल हो।
Shri Peeyush Sonkar ने स्पष्ट किय की “Auction तब आयोजित किया जाता है जब बकाया वसूलने का कोई और विकल्प नहीं बचता। यदि dues समय पर clear हो जाते, तो Department सोना वापस कर देता। हम इसे trustee की तरह रखते हैं, जब तक dues पूरी तरह settle नहीं होते। नीलामी में जो व्यक्ति सोना खरीदता है, वह अब GST के तहत वैध transaction करेगा। इस तरह काला धन सीधे market में नहीं आता, बल्कि इसे संपूर्ण पारदर्शिता के साथ market में लाया जाता है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरी प्रक्रिया केवल government dues की recovery के लिए होती है, और auction का उद्देश्य किसी भी तरह का financial gain नहीं था।
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-Deepanshu Kasera, Journalist


