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महिला आरक्षण 33 प्रतिशत राजनीति: संसद में बड़ा बदलाव तय

गांव मंच डेस्क जयपुर, 15 अप्रैल | महिला आरक्षण 33 प्रतिशत को लेकर देश में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है, जिससे उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी।

भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम अब चर्चा में है। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है।

क्या है यह कानून और क्यों जरूरी

यह अधिनियम संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करता है, जिसमें सामान्य, SC और ST श्रेणियों की सीटों में भी महिलाओं का कोटा शामिल होगा।
भारत में महिलाओं की आबादी लगभग 48–49 प्रतिशत है, लेकिन लोकसभा में उनकी हिस्सेदारी करीब 14–15 प्रतिशत ही है, जो वैश्विक औसत (26–27 प्रतिशत) से कम है।

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वर्तमान स्थिति के आंकड़े

लोकसभा की 543 सीटों में महिलाओं की संख्या करीब 75–80 के बीच रहती है। कई राज्य विधानसभाओं में यह आंकड़ा 10 प्रतिशत से भी कम है।
इसके विपरीत, पंचायत स्तर पर 33 से 50 प्रतिशत तक आरक्षण लागू है, जहां देशभर में 14 लाख से अधिक महिला जनप्रतिनिधि सक्रिय हैं।

लागू होने के बाद क्या बदलाव संभव

रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकसभा सीटें 800–850 तक बढ़ाई जा सकती हैं। ऐसे में लगभग 270 से अधिक सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं।
इससे महिला प्रतिनिधित्व लगभग दोगुना होकर 30 प्रतिशत से अधिक हो सकता है, जो वर्तमान 14–15 प्रतिशत से काफी ज्यादा है।

पहले और बाद की स्थिति

अब तक संसद में महिलाओं की भागीदारी सीमित रही है, जबकि पंचायत स्तर पर आरक्षण के कारण उनकी हिस्सेदारी 33–50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
इसी मॉडल के आधार पर अनुमान है कि संसद और विधानसभाओं में भी महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ेगी और नीति निर्माण में संतुलन आएगा।

चुनौतियां और प्रक्रिया

इस कानून को लागू करने से पहले जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। इसी वजह से इसके लागू होने में समय लग सकता है।
कुछ राजनीतिक दलों ने परिसीमन के बाद सीटों के संतुलन को लेकर चिंता भी जताई है।

संभावित असर

विशेषज्ञों के अनुसार, महिला प्रतिनिधित्व बढ़ने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाओं पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है।
अगर प्रक्रिया समय पर पूरी होती है, तो यह आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू किया जा सकता है।

“चुनाव और प्रतिनिधित्व से जुड़े डेटा के लिए Election Commission of India की वेबसाइट विजिट करें।”

राजस्थान में पंचायतों, ग्राम सभाओं और ग्रामीण योजनाओं से जुड़ी ताज़ा खबरें गाँव मंच के पंचायत सेक्शन में भी उपलब्ध हैं।

– Manisha Bhambhu , Journalist

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