गावं मंच पुणे, 27 मई। जब भी खेती का जिक्र होता है, तो अमूमन आँखों के सामने कई एकड़ ज़मीन, तपती धूप और भारी नुकसान का डर घूमने लगता है। इसी वजह से आज की पढ़ी-लिखी पीढ़ी खेती को एक बेहतर करियर ऑप्शन नहीं मानती। लेकिन महाराष्ट्र में पुणे के रहने वाले गौतम राठोड ने इस पूरी सोच और पारंपरिक ढर्रे को बदल दिया है। उन्होंने अपने घर की महज 100 स्क्वायर फीट की छत पर कश्मीर की शान कहे जाने वाले केसर की सफल इनडोर खेती कर दिखाई है। आज उनका यह शुद्ध ऑर्गेनिक केसर ₹6 लाख प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है।
इस पूरी सफलता की सबसे बड़ी बात यह है कि गौतम ने केसर उगाने के लिए न तो मिट्टी का इस्तेमाल किया और न ही किसी बड़े चौड़े खेत का।
गौतम की सफलता के 3 सबसे बड़े स्तंभ
- कैंसर को मात देकर नई शुरुआत: गौतम राठोड पहले अपना एक ऑटो गैराज चलाते थे। साल 2020 में उन्हें किडनी कैंसर का पता चला, जिसके इलाज के दौरान उनकी एक किडनी निकालनी पड़ी। डॉक्टरों ने उन्हें भारी शारीरिक मेहनत या धूप में काम करने से मना कर दिया। ऐसे में गौतम ने हार मानने के बजाय इंटरनेट पर रिसर्च की और बिना मिट्टी के, हवा में पौधे उगाने वाली आधुनिक एयरोपोनिक्स तकनीक (Aeroponics Technology) को ढूंढ निकाला।
- छत पर बनाया कश्मीर जैसा कृत्रिम मौसम: गौतम ने अपनी 100 स्क्वायर फीट की छत पर एक छोटा सा ‘कोल्ड रूम’ (क्लोज लैब) तैयार किया। उन्होंने करीब ₹4 लाख का निवेश करके वहां स्पेशल लाइट्स और चिलर सिस्टम लगाए, जिससे कमरे का तापमान और नमी बिल्कुल कश्मीर की वादियों जैसी हो गई। इसके बाद वे कश्मीर से केसर के उन्नत बीज (Corms) लाए और उन्हें बिना मिट्टी के वर्टिकल ट्रे में सेट कर दिया।
- शुद्धता से मिला ₹6 लाख का भाव: कुछ महीनों की वैज्ञानिक देखरेख के बाद जब केसर के फूल खिले, तो उनकी क्वालिटी विश्वस्तरीय थी। बिना किसी केमिकल के उगे इस पूरी तरह ऑर्गेनिक केसर को गौतम आज सीधे ग्राहकों को ₹500 से ₹800 रुपये प्रति ग्राम के रेट पर बेच रहे हैं, जो सीधे तौर पर ₹6 लाख प्रति किलो बैठता है।

‘फसल ऐप’ बना इस आधुनिक खेती का डिजिटल पार्टनर
इस तरह की इनडोर वर्िकल फार्मिंग में सबसे बड़ी चुनौती होती है पल-पल बदलते तापमान और आर्द्रता (Moisture) को नियंत्रित रखना। जरा सी लापरवाही से पूरी फसल खराब हो सकती है। इस काम में गौतम के लिए ‘फसल ऐप’ (Fasal App) एक बड़ा मददगार साबित हुआ।
यह एग्री-टेक ऐप इनडोर लैब में लगे सेंसर्स की मदद से सीधे किसान के मोबाइल पर हर समय का लाइव डेटा भेजता रहता है। कब तापमान बढ़ाना है, कब नमी कम करनी है और पौधों को कब पोषण की जरूरत है, यह ऐप पहले ही सटीक अलर्ट जारी कर देता है, जिससे फसल खराब होने का रिस्क बिल्कुल खत्म हो गया।
पढ़े-लिखे युवाओं के लिए एक नया एग्री-टेक बिजनेस मॉडल
“गौतम राठोड की यह प्रेरक कहानी साफ करती है कि आज की खेती सिर्फ पारंपरिक हल चलाने तक सीमित नहीं रही। डेटा और साइंस की मदद से अब मौसम की अनिश्चितता को पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। एक छोटा सा कमरा या आपकी छत भी नया स्टार्टअप ऑफिस बन सकती है।” — दीपांशु कासेरा, कृषि पत्रकार
आज का युवा जो नौकरी की तलाश में भटक रहा है, वह इस एग्री-टेक क्रांति का हिस्सा बनकर कम जगह में बड़ा मुनाफा कमा सकता है। तकनीक ने पारंपरिक खेती के रिस्क को कम करके मुनाफे को बिल्कुल पक्का कर दिया है।
- एयरोपोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स और इनडोर वर्टिकल फार्मिंग जैसी आधुनिक तकनीकों पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी, ट्रेनिंग और राष्ट्रीय कृषि विकास योजनाओं की प्रामाणिक जानकारी के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के वेब पोर्टल पर विजिट करें।
- महाराष्ट्र राज्य में बागवानी (Horticulture) और संरक्षित खेती (Protected Cultivation) के लिए चलाई जा रही विभागीय योजनाओं के दिशा-निर्देशों को देखने के लिए कृषि विभाग, महाराष्ट्र शासन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
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नोट:- यह विचार लेखक पत्रकार दीपांशु कसेरा Deepanshu Kasera के है।


