Gaonmanch

भारत को आत्मनिर्भर बनाने की राह, दाल-तिलहन पर बढ़ा फोकस

गांव मंच डेस्क, नई दिल्ली

भारत हर साल खाद्य तेलों के आयात पर हजारों करोड़ रुपये खर्च करता है। वहीं कई बार दालों की बढ़ती कीमतें आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ देती हैं। अब सरकार इस चुनौती का समाधान खेतों में तलाश रही है।

केंद्र सरकार ने राज्यों से खरीफ सीजन में दलहन और तिलहन फसलों की बुवाई पर विशेष ध्यान देने को कहा है। सरकार चाहती है कि किसान अधिक से अधिक दाल और तिलहन उगाएं, ताकि देश की आयात पर निर्भरता कम हो और किसानों की आय बढ़ सके।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब खरीफ सीजन की तैयारियां पूरे देश में शुरू हो चुकी हैं। किसान बीज, खाद और बुवाई की योजना बनाने में जुटे हैं।

आखिर दाल और तिलहन पर इतना जोर क्यों ?

देश में खाद्य तेल की मांग लगातार बढ़ रही है। लेकिन उत्पादन अभी भी जरूरत से कम है।

इसी वजह से भारत को बड़ी मात्रा में खाद्य तेल विदेशों से मंगाना पड़ता है। दूसरी तरफ अरहर, उड़द और मूंग जैसी दालों की मांग भी लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि किसान इन फसलों का रकबा बढ़ाते हैं, तो देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी और किसानों को बेहतर बाजार भी मिल सकता है।

किसानों के लिए 3 बड़े मौके

  1. बढ़ती मांग का सीधा फायदा

दाल और खाद्य तेल हर घर की जरूरत हैं। इसलिए इन फसलों की मांग लगातार बनी रहती है।

जब मांग मजबूत रहती है, तो किसानों को अच्छे दाम मिलने की संभावना भी बढ़ती है।

  1. कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए बेहतर विकल्प

राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में किसान बारिश की अनिश्चितता का सामना करते हैं।

ऐसे इलाकों में मूंग, उड़द, तिल और मूंगफली जैसी फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकती हैं।

  1. मिट्टी की सेहत को भी फायदा

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार दलहन फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाने में मदद करती हैं।

इससे खेत की उर्वरता बेहतर होती है और अगली फसल को भी फायदा मिलता है।

किसान क्या कहते हैं ?

राजस्थान के कई किसान पिछले कुछ वर्षों से बाजरे के साथ मूंग और तिल की खेती अपना रहे हैं।

किसानों का अनुभव है कि फसल विविधीकरण से जोखिम कम होता है। एक फसल कमजोर रहने पर दूसरी फसल नुकसान की भरपाई कर सकती है।

यही कारण है कि कृषि विशेषज्ञ भी किसानों को केवल एक फसल पर निर्भर नहीं रहने की सलाह देते हैं।

सरकार की योजना में क्या शामिल है?

कृषि मंत्रालय ने राज्यों को गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।

साथ ही किसानों तक तकनीकी सलाह और आधुनिक खेती की जानकारी पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रेरित करना भी है जिनकी बाजार में स्थायी मांग बनी रहती है।

किसान अभी क्या करें?

  • अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्त दलहन और तिलहन फसल चुनें।
  • प्रमाणित बीजों का उपयोग करें।
  • कृषि विभाग की सलाह लें।
  • मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें।
  • फसल बीमा और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें।
  • एक से अधिक फसलों की योजना बनाकर जोखिम कम करें।

आत्मनिर्भर भारत की शुरुआत खेत से

देश की खाद्य सुरक्षा केवल गोदामों से नहीं, बल्कि किसानों के खेतों से तय होती है।

आज सरकार दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने की बात कर रही है। लेकिन इसकी असली सफलता तब होगी, जब किसान इसे अवसर के रूप में अपनाएंगे।

यदि सही योजना, बेहतर बीज और वैज्ञानिक सलाह साथ मिले, तो दलहन और तिलहन की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ भारत को भी अधिक आत्मनिर्भर बना सकती है।

लेखक: एंजेल कटारिया

Scroll to Top