राजस्थान सरकार ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति को और अधिक सख्ती से लागू करते हुए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग, अनुशासनहीनता और गंभीर कदाचार से जुड़े लगभग 40 मामलों में कार्रवाई की है। इन निर्णयों का उद्देश्य प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाना और पारदर्शी शासन व्यवस्था को मजबूत करना है।
लैंगिक उत्पीड़न मामले में प्राचार्य बर्खास्त
राजकीय महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज में छात्राओं के लैंगिक उत्पीड़न से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया। कॉलेज के प्राचार्य को सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही इस प्रकरण में सहयोग करने वाले एक प्रवक्ता और पुस्तकालयाध्यक्ष को भी सेवा से हटाने की मंजूरी दी गई है। यह कदम कार्यस्थल और शिक्षण संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।

6 गंभीर मामलों में अभियोजन स्वीकृति
राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत 6 गंभीर मामलों में अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है। इनमें सवाई मानसिंह चिकित्सालय के वरिष्ठ आचार्य, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता, वित्तीय सलाहकार, सहायक अभियंता और विकास अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई का निर्णय शामिल है। इन मामलों में पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर अवैध लाभ लेने के आरोप हैं।
भ्रष्ट सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन पर रोक
- मुख्यमंत्री ने सेवा काल में भ्रष्टाचार और दुराचरण में संलिप्त पाए गए 10
- सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकने का निर्णय लिया है।
- इनमें 5 मामलों में शत-प्रतिशत पेंशन रोकने की स्वीकृति दी गई है।
- कुछ मामलों में न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि के बाद यह कार्रवाई की गई, जबकि अन्य
- मामलों में विभागीय जांच पूरी होने तक पेंशन रोकी जाएगी।
5 मामलों में एसीबी को जांच की अनुमति
- भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा
- 17-ए के अंतर्गत 5 मामलों में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को विस्तृत जांच और आगामी अन्वेषण की अनुमति दी है।
- इससे भ्रष्टाचार के मामलों में जांच प्रक्रिया को गति मिलेगी।
वेतन वृद्धि रोकने और दंड संबंधी निर्णय
- राजस्थान सिविल सेवा नियमों के तहत 6 मामलों में अधिकारियों की वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोकने का निर्णय लिया गया है।
- वहीं कुछ मामलों में परिनिंदा का दंड दिया गया तथा दो रिव्यू याचिकाओं में राहत प्रदान करते हुए
- वेतन वृद्धि रोकने के दंड को परिनिंदा में बदला गया। चार रिव्यू याचिकाओं को खारिज करते हुए पूर्व दंडादेश यथावत रखे गए हैं।
पारदर्शी प्रशासन की दिशा में बड़ा संदेश
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के इन फैसलों से स्पष्ट संकेत मिलता है
- कि राजस्थान सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति को केवल घोषणा तक सीमित नहीं रख रही,
- बल्कि समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई के माध्यम से उसे प्रभावी रूप से लागू कर रही है।
- भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और गंभीर कदाचार के मामलों में जवाबदेही तय करने की यह पहल
- प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जनविश्वास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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Edited by – Riddhima


