गाँव मंच डेस्क, ‘राधेश्याम रामायण’ भारतीय साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों में शामिल है। इस विषय पर श्री राजेन्द्र बोड़ा का विशेष वक्तव्य होगा। उनके वक्तव्य में रामायण की साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा पर चर्चा होगी। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर भी संवाद होगा।
साकुराको आबे से होगा विशेष सांस्कृतिक संवाद
- साकुराको आबे टोक्यो की डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता हैं। वह कल्चरल प्रोड्यूसर के रूप में भी सक्रिय हैं।
- उनका काम भारत और जापान के संबंधों पर केंद्रित है। वह दोनों देशों के आध्यात्मिक और कलात्मक रिश्तों को सामने लाती हैं।
- चर्चा में उनके सांस्कृतिक कार्यों और अनुभवों पर बातचीत होगी।


साकुराको आबे ने टोक्यो में Gallery DEEPDAN की स्थापना की है। यह शिमोकिताज़ावा क्षेत्र में स्थित सांस्कृतिक मंच है। यहां प्रदर्शनियां और फिल्म स्क्रीनिंग आयोजित होती हैं। यहां भारत की लोक कलाओं पर बातचीत भी होती है। दीपदान प्रकाशन के क्षेत्र में भी काम कर रहा है। भारत के सहयोग से किताबें प्रकाशित करने की तैयारी है।
भारतीय लोक संस्कृति को जापान तक पहुंचाने का प्रयास
- वर्ष 2018 में आबे ने सखी प्रो की स्थापना की। इसके जरिए उन्होंने भारतीय लोक संस्कृति पर काम किया।
- उन्होंने बंगाली लोक गायिका पार्वती बाउल को जापान आमंत्रित किया।
- उनके जीवन और कला पर दो फिल्मों का निर्माण हुआ। इनमें द पाथ : पार्वती बाउल इन जापान शामिल है।
लोक कला और परंपराओं पर डॉक्यूमेंट्री कार्य
- वर्ष 2024 में उन्होंने दो शैक्षिक वृत्तचित्र बनाए। ये जापान के नेशनल म्यूजियम ऑफ एथनोलॉजी के लिए तैयार हुए।
- इनमें टू लिव एज अ पटुआ शामिल है।
Edited by- Krishika Agarwal


