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प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में राजस्थान का शानदार प्रदर्शन, नागौर देशभर में पहले स्थान पर

जयपुर, 13 अक्टूबर। राजस्थान में कृषि विकास और किसानों की समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश कृषि उत्पादकता, फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। योजना के तहत देशभर के 100 चयनित जिलों में राजस्थान के आठ जिले शामिल हैं। इनमें नागौर जिले ने फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती के क्षेत्र में देशभर में पहला स्थान हासिल किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किसान कल्याण संबंधी प्राथमिकताओं के अनुरूप इस योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को दूर करना है। इसके तहत सिंचाई, भंडारण, कृषि ऋण और उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

फसल विविधीकरण में नागौर देशभर में अव्वल

  • प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत नागौर जिले ने फसल विविधीकरण
  • और टिकाऊ खेती के तरीकों को बढ़ावा देने में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
  • उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नागौर ने 18.44 अंक प्राप्त कर देशभर में पहला स्थान हासिल किया है।
  • फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाने और किसानों तक दीर्घकालीन कृषि ऋण की पहुंच बेहतर बनाने में नागौर चौथे स्थान पर रहा।
  • वहीं, खेतों की उत्पादकता बढ़ाने तथा बेहतर प्रशासन और सेवाएं उपलब्ध कराने के मामले में जिले ने पांचवां स्थान प्राप्त किया है।
  • सिंचाई के बुनियादी ढांचे में सुधार के क्षेत्र में पाली जिले ने देशभर में आठवां स्थान हासिल किया है।
  • ये उपलब्धियां राजस्थान के कृषि विकास प्रयासों को दर्शाती हैं।

ओवरऑल रैंकिंग में भी राजस्थान की मजबूत स्थिति

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत देशभर के 100 चयनित जिलों में कृषि विकास से जुड़े विभिन्न लक्ष्यों पर काम किया जा रहा है। इसके लिए 11 विभागों की 36 योजनाओं को एकीकृत रूप से लागू किया जा रहा है।

इन योजनाओं के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही, भंडारण क्षमता और कृषि ऋण की उपलब्धता बेहतर बनाने के प्रयास भी शामिल हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सभी उद्देश्यों के समग्र प्रदर्शन में नागौर ने 84.13 अंक प्राप्त किए हैं। इसके साथ जिला देशभर में दूसरे स्थान पर है। वहीं, पाली जिले ने समग्र प्रदर्शन में 11वां स्थान हासिल किया है।

जैसलमेर में जीरे की खेती और सौर सिंचाई को मिली पहचान

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत जिलों का चयन कम कृषि उत्पादकता, कम फसल सघनता और खेती के लिए सीमित ऋण उपलब्धता जैसे मानकों पर किया गया है।

जैसलमेर जिले में भी टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। यहां 2,000 एकड़ क्षेत्र में एकीकृत कीट प्रबंधन आधारित जीरे की खेती की गई है। इसके अलावा, 500 एकड़ क्षेत्र में सौर ऊर्जा आधारित स्प्रिंकलर सिंचाई का उपयोग किया गया है।

इन पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिलने की जानकारी दी गई है। सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई से पानी के कुशल उपयोग को बढ़ावा मिलता है। वहीं, एकीकृत कीट प्रबंधन फसल सुरक्षा और टिकाऊ खेती में सहायक हो सकता है।

36 योजनाओं के जरिए कृषि विकास पर जोर

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। इसमें कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, नीति आयोग और नाबार्ड की भूमिका भी शामिल है।

योजना से जुड़ी प्रमुख योजनाओं में पीएम-किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पीएम-किसान मानधन योजना शामिल हैं। इसके अलावा, पीएम-कुसुम, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और कृषोन्नति योजना भी इसमें शामिल हैं।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और परंपरागत कृषि विकास योजना के माध्यम से भी कृषि क्षेत्र को सहयोग दिया जा रहा है। इसके साथ बागवानी विकास, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन से जुड़ी योजनाओं को भी शामिल किया गया है।

किसान क्रेडिट कार्ड, प्राथमिक कृषि साख समितियों के कम्प्यूटरीकरण और ग्रामीण सड़क संपर्क जैसी व्यवस्थाएं भी इस व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य किसानों को वित्तीय सहायता, बेहतर सुविधाएं और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना है।

मॉनिटरिंग और रैंकिंग से योजनाओं के क्रियान्वयन पर नजर

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी की व्यवस्था की गई है। जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। वहीं, राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में निगरानी की जाती है।

राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कार्यकारी समिति बनाई गई है। इसके अलावा, सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय निगरानी समिति योजना के क्रियान्वयन पर नजर रखती है।

नीति आयोग के पोर्टल के माध्यम से चयनित जिलों की मासिक रैंकिंग भी की जाती है। इसका उद्देश्य जिलों के प्रदर्शन में सुधार करना और योजनाओं की प्रगति का आकलन करना है।

कृषि विकास से किसानों की समृद्धि का लक्ष्य

  • प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों को दूर करना
  • और किसानों के लिए बेहतर अवसर तैयार करना है।
  • राजस्थान के नागौर, पाली और जैसलमेर जिलों की पहल इस दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
  • कृषि उत्पादकता में सुधार, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और भंडारण क्षमता बढ़ने से किसानों को लाभ मिल सकता है।
  • साथ ही, टिकाऊ खेती और फसल विविधीकरण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद कर सकते हैं।
  • राजस्थान में इन प्रयासों का प्रभावी क्रियान्वयन किसानों की आय बढ़ाने
  • और कृषि क्षेत्र को अधिक सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

फसल विविधीकरण में नागौर देशभर में अव्वल

  • प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत नागौर जिले ने फसल विविधीकरण
  • और टिकाऊ खेती के तरीकों को बढ़ावा देने में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
  • उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नागौर ने 18.44 अंक प्राप्त कर देशभर में पहला स्थान हासिल किया है।
  • फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाने और किसानों तक दीर्घकालीन
  • कृषि ऋण की पहुंच बेहतर बनाने में नागौर चौथे स्थान पर रहा।
  • वहीं, खेतों की उत्पादकता बढ़ाने तथा बेहतर प्रशासन और सेवाएं उपलब्ध कराने के मामले में जिले ने पांचवां स्थान प्राप्त किया है।
  • सिंचाई के बुनियादी ढांचे में सुधार के क्षेत्र में पाली जिले ने देशभर में आठवां स्थान हासिल किया है।
  • ये उपलब्धियां राजस्थान के कृषि विकास प्रयासों को दर्शाती हैं।

ओवरऑल रैंकिंग में भी राजस्थान की मजबूत स्थिति

  • प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत देशभर के 100 चयनित जिलों में
  • कृषि विकास से जुड़े विभिन्न लक्ष्यों पर काम किया जा रहा है।
  • इसके लिए 11 विभागों की 36 योजनाओं को एकीकृत रूप से लागू किया जा रहा है।
  • इन योजनाओं के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने
  • और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है।
  • साथ ही, भंडारण क्षमता और कृषि ऋण की उपलब्धता बेहतर बनाने के प्रयास भी शामिल हैं।
  • उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सभी उद्देश्यों के समग्र प्रदर्शन में नागौर ने 84.13 अंक प्राप्त किए हैं।
  • इसके साथ जिला देशभर में दूसरे स्थान पर है। वहीं, पाली जिले ने समग्र प्रदर्शन में 11वां स्थान हासिल किया है।

जैसलमेर में जीरे की खेती और सौर सिंचाई को मिली पहचान

  • प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत जिलों का चयन कम कृषि उत्पादकता, कम फसल सघनता
  • और खेती के लिए सीमित ऋण उपलब्धता जैसे मानकों पर किया गया है।
  • जैसलमेर जिले में भी टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।
  • यहां 2,000 एकड़ क्षेत्र में एकीकृत कीट प्रबंधन आधारित जीरे की खेती की गई है।
  • इसके अलावा, 500 एकड़ क्षेत्र में सौर ऊर्जा आधारित स्प्रिंकलर सिंचाई का उपयोग किया गया है।
  • इन पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिलने की जानकारी दी गई है।
  • सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई से पानी के कुशल उपयोग को बढ़ावा मिलता है।
  • वहीं, एकीकृत कीट प्रबंधन फसल सुरक्षा और टिकाऊ खेती में सहायक हो सकता है।

फसल विविधीकरण से किसानों को मिलेंगे बेहतर अवसर

  • फसल विविधीकरण कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
  • इससे किसान बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से जुड़े जोखिम कम कर सकते हैं।
  • साथ ही, विभिन्न फसलों के उत्पादन से आय के नए अवसर भी मिल सकते हैं।
  • बाजरा और दलहन जैसी पोषक फसलों को बढ़ावा देने से पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।
  • इसके साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और कृषि भूमि की उत्पादकता बनाए रखने में मदद मिलती है।
  • योजना का उद्देश्य किसानों को खेती के बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना है।
  • इससे कृषि क्षेत्र का दीर्घकालीन विकास सुनिश्चित करने में सहायता मिल सकती है।

36 योजनाओं के जरिए कृषि विकास पर जोर

  • प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।
  • इसमें कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, नीति आयोग और नाबार्ड की भूमिका भी शामिल है।
  • योजना से जुड़ी प्रमुख योजनाओं में पीएम-किसान सम्मान निधि,
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पीएम-किसान मानधन योजना शामिल हैं।
  • इसके अलावा, पीएम-कुसुम, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और कृषोन्नति योजना भी इसमें शामिल हैं।
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और परंपरागत
  • कृषि विकास योजना के माध्यम से भी कृषि क्षेत्र को सहयोग दिया जा रहा है।
  • इसके साथ बागवानी विकास, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन से जुड़ी योजनाओं को भी शामिल किया गया है।
  • किसान क्रेडिट कार्ड, प्राथमिक कृषि साख समितियों के कम्प्यूटरीकरण
  • और ग्रामीण सड़क संपर्क जैसी व्यवस्थाएं भी इस व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं।
  • इनका उद्देश्य किसानों को वित्तीय सहायता, बेहतर सुविधाएं और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना है।

मॉनिटरिंग और रैंकिंग से योजनाओं के क्रियान्वयन पर नजर

  • प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला, राज्य
  • और राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी की व्यवस्था की गई है।
  • जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है।
  • वहीं, राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में निगरानी की जाती है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कार्यकारी समिति बनाई गई है।
  • इसके अलावा, सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय निगरानी समिति योजना के क्रियान्वयन पर नजर रखती है।
  • नीति आयोग के पोर्टल के माध्यम से चयनित जिलों की मासिक रैंकिंग भी की जाती है।
  • इसका उद्देश्य जिलों के प्रदर्शन में सुधार करना और योजनाओं की प्रगति का आकलन करना है।

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Edited by – Riddhima

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