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उदयपुर में पहली बार शुरू हुई काली अदरक की खेती, किसानों के लिए खुल सकते हैं नए अवसर

गाँव मंच डेस्क | राजस्थान में किसान अब पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर नई और लाभकारी खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

  • उदयपुर में पहली बार काली अदरक की खेती की शुरुआत हुई है |
  • जिसे औषधीय गुणों और बाजार में बढ़ती मांग के कारण किसानों के लिए कमाई का नया जरिया माना जा रहा है।
  • यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो राज्य के अन्य किसानों के लिए भी नए अवसर खुल सकते हैं।

औषधीय खेती की ओर बढ़ रहा उदयपुर

  • राजस्थान का उदयपुर जिला अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ औषधीय फसलों की खेती में भी नई पहचान बना रहा है।
  • हल्दी और अदरक उत्पादन के लिए प्रसिद्ध यह क्षेत्र अब काली अदरक की खेती को लेकर चर्चा में है।
  • मावली क्षेत्र के सनवाड़-छाहीड़ी गांव के प्रगतिशील किसान शंकरलाल डांगी ने पहली बार काली अदरक की खेती शुरू कर किसानों के सामने नया विकल्प पेश किया है।

नागालैंड से मंगवाए बीज

  • किसान शंकरलाल डांगी ने नागालैंड से करीब 700 किलोग्राम काली अदरक के बीज मंगवाए।
  • मार्च महीने में उन्होंने लगभग 0.2 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बुवाई की।
  • फसल की बेहतर वृद्धि और पानी की बचत के लिए खेत में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम भी लगाया गया है।
  • इस तकनीक के लिए उद्यान विभाग की ओर से अनुदान का लाभ भी मिला है।

बढ़ रही है काली अदरक की मांग

  • कृषि विशेषज्ञों के अनुसार काली अदरक में सामान्य अदरक की तुलना में अधिक औषधीय गुण पाए जाते हैं।
  • इसका उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं, हर्बल उत्पादों और स्वास्थ्य संबंधी कई उत्पादों में किया जाता है।
  • यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

किसानों के लिए बन सकता है बेहतर विकल्प

  • यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो उदयपुर ही नहीं, बल्कि राजस्थान के अन्य किसानों के लिए भी काली अदरक की खेती आय बढ़ाने का नया माध्यम बन सकती है।
  • कम क्षेत्र में अधिक मूल्य वाली इस फसल से किसानों को बेहतर लाभ मिलने की संभावना है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि औषधीय फसलों की बढ़ती मांग भविष्य में किसानों के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है।

Writer-तनु रूंगटा

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