गाँव मंच डेस्क, | जब दुनिया टिकाऊ खेती के नए मॉडल तलाश रही है |
- तब अमेजन के आदिवासी समुदाय हजारों साल पुरानी एक ऐसी कृषि पद्धति को जीवित रखे हुए हैं |
- जो बिना कीटनाशकों के खाद्य उत्पादन करती है और कुछ वर्षों बाद जमीन को फिर से जंगल में बदल देती है।
- चागरा खेती के नाम से जानी जाने वाली यह प्रणाली आज पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि का अनूठा उदाहरण बन गई है।
अमेजन के जंगलों में अनोखी खेती
- कोलंबिया के अमेजन वर्षावन में रहने वाले आदिवासी समुदाय सदियों से चागरा खेती प्रणाली का पालन कर रहे हैं।
- यह खेती छोटे-छोटे भूखंडों पर की जाती है, जिनका आकार आमतौर पर दो हेक्टेयर से कम होता है। यहां हर पौधे और बीज की अपनी जगह और उद्देश्य होता है।
प्रकृति के साथ तालमेल
- चागरा खेती जंगल के प्राकृतिक चक्रों के अनुसार संचालित होती है।
- बुवाई, कटाई और पुनः रोपण का समय मौसम, फलों, मछलियों और वन्यजीवों के प्राकृतिक चक्रों के आधार पर तय किया जाता है।
- यही कारण है कि इस प्रणाली में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती।
पांच साल बाद फिर बन जाता है जंगल
- चागरा खेती की सबसे खास बात यह है कि भूमि का लगातार उपयोग नहीं किया जाता।
- लगभग पांच से छह साल खेती करने के बाद खेत को छोड़ दिया जाता है, जिससे वह क्षेत्र धीरे-धीरे फिर से वर्षावन में बदल जाता है।
- इस प्रक्रिया से जैव विविधता सुरक्षित रहती है और कार्बन भी प्रभावी रूप से संग्रहित होता है।
दुनिया के लिए सीख
- विशेषज्ञों का मानना है कि चागरा खेती आधुनिक कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण हो सकती है।
- यह प्रणाली खाद्य उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को एक साथ जोड़ती है।
- हालांकि खनन, वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और अवैध गतिविधियों के कारण यह पारंपरिक ज्ञान खतरे में है।
- ऐसे में इस अनूठी कृषि पद्धति को संरक्षित करना समय की बड़ी जरूरत बन गया है।
लेखिका- एंजल कटारिया


