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एथेनॉल के लिए शुगर डायवर्जन रोकने की कवायद, 1,100 करोड़ लीटर की निविदा जारी

नई दिल्ली। देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और आगामी सीजन में संभावित उत्पादन कमी को देखते हुए एथेनॉल खरीद नीति में बदलाव किया गया है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की ओर से आपूर्ति वर्ष 2026-27 के लिए जारी नई निविदा में गन्ने के रस, चीनी, चीनी सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल को बाहर रखा गया है। इसके बजाय मक्का, टूटे चावल और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अतिरिक्त चावल से बनने वाले एथेनॉल की खरीद पर जोर दिया गया है।

  • दी गई जानकारी के अनुसार, नई निविदा में कुल 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल की मांग रखी गई है।
  • हालांकि, सी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।
  • इस बदलाव का असर चीनी मिलों, एथेनॉल उत्पादकों और अनाज आधारित डिस्टिलरी पर पड़ सकता है।

चीनी उत्पादन में कमी की आशंका के बीच फैसला

  • देश में आगामी सीजन के दौरान चीनी उत्पादन प्रभावित होने की आशंका के बीच एथेनॉल उत्पादन
  • के लिए चीनी के इस्तेमाल को सीमित करने की दिशा में कदम उठाया गया है।
  • सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना
  • और कीमतों पर संभावित दबाव को नियंत्रित करना है।
  • महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कम बारिश के कारण गन्ने की पैदावार को लेकर चिंता जताई जा रही है।
  • वहीं, उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में बाढ़, बीमारियों और कीटों के प्रकोप से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
  • पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के तहत पहले अतिरिक्त चीनी का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में बढ़ाने पर जोर दिया गया था।
  • उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले आपूर्ति वर्ष में एथेनॉल बनाने के लिए लगभग 29 लाख टन चीनी का इस्तेमाल किया गया था।
  • अब संभावित उत्पादन कमी को देखते हुए गैर-गन्ना आधारित कच्चे माल से एथेनॉल बनाने को प्राथमिकता दी जा रही है।

गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल पर रोक

  • नई निविदा में गन्ने के रस, चीनी, चीनी सिरप
  • और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल के प्रस्ताव शामिल नहीं किए गए हैं।
  • इन स्रोतों से एथेनॉल बनाने के लिए चीनी उत्पादन में
  • इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल या चीनी का अधिक प्रत्यक्ष उपयोग होता है।
  • बी-हैवी शीरे से एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया में भी चीनी उत्पादन
  • के लिए उपलब्ध सुक्रोज का कुछ हिस्सा एथेनॉल की ओर डायवर्ट होता है।
  • इसलिए, इस स्रोत से एथेनॉल उत्पादन सीमित करने का उद्देश्य
  • घरेलू बाजार के लिए चीनी की उपलब्धता को प्राथमिकता देना है।
  • हालांकि, सी-हैवी शीरे से बनने वाले एथेनॉल को छूट दी गई है।
  • सी-हैवी शीरा चीनी निर्माण प्रक्रिया के अंतिम चरण में बचने वाला उप-उत्पाद है,
  • जिसमें अपेक्षाकृत कम अवशिष्ट चीनी होती है।
  • इसके इस्तेमाल को जारी रखने से डिस्टिलरी को एथेनॉल उत्पादन का एक विकल्प मिलता रहेगा।

मक्का आधारित एथेनॉल की कीमत में कटौती

  • नई निविदा में मक्का से बनने वाले एथेनॉल की कीमत में भी बदलाव किया गया है।
  • दी गई जानकारी के मुताबिक, मक्का आधारित एथेनॉल पर मिलने वाला प्रोत्साहन 5.79 रुपये प्रति
  • लीटर से घटाकर 2.79 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
  • इसके साथ ही, मक्का आधारित एथेनॉल का खरीद मूल्य 71.86 रुपये से घटकर 68.86 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
  • कीमत में इस बदलाव का असर मक्का से एथेनॉल बनाने वाली डिस्टिलरी और इससे जुड़े आपूर्ति कारोबार पर पड़ सकता है।
  • नई व्यवस्था में मक्का, टूटे चावल और FCI के अतिरिक्त चावल को एथेनॉल उत्पादन के प्रमुख स्रोतों के रूप में शामिल किया गया है।
  • इससे अनाज आधारित एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

चीनी मिलों और अनाज उत्पादकों पर क्या होगा असर?

एथेनॉल खरीद नीति में बदलाव से चीनी उद्योग और अनाज आधारित एथेनॉल क्षेत्र के बीच कच्चे माल की मांग का संतुलन प्रभावित हो सकता है।

  • चीनी मिलें: गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से एथेनॉल बनाने के विकल्प सीमित होने पर मिलों को चीनी उत्पादन और एथेनॉल आपूर्ति की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।
  • मक्का उत्पादक: अनाज आधारित एथेनॉल की मांग बढ़ने से मक्का की औद्योगिक खपत को समर्थन मिल सकता है, हालांकि वास्तविक असर खरीद और उत्पादन के आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
  • डिस्टिलरी उद्योग: अनाज आधारित संयंत्रों की भूमिका बढ़ सकती है, जबकि गन्ना आधारित एथेनॉल उत्पादन करने वाली इकाइयों को अपनी आपूर्ति रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।
  • चीनी उपभोक्ता: घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन खुदरा कीमतों पर वास्तविक प्रभाव उत्पादन, मांग और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा।

E20 कार्यक्रम के लिए एथेनॉल आपूर्ति महत्वपूर्ण

  • भारत में पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने के उद्देश्य से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
  • इस कार्यक्रम के तहत एथेनॉल की पर्याप्त और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
  • नई निविदा में गैर-गन्ना आधारित स्रोतों को प्राथमिकता देने से एथेनॉल उत्पादन
  • के लिए कच्चे माल में विविधता बढ़ाने का प्रयास दिखाई देता है।
  • हालांकि, 1,100 करोड़ लीटर की मांग को पूरा करने में अनाज की उपलब्धता, उत्पादन क्षमता,
  • परिवहन लागत और खरीद मूल्य की भूमिका अहम होगी।
  • आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई खरीद व्यवस्था से घरेलू चीनी की उपलब्धता, एथेनॉल की आपूर्ति
  • और कृषि उत्पादों की मांग पर क्या असर पड़ता है।

अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें।

https://mopng.gov.in/

Edited by – Krishika Agarwal

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