जयपुर। अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने गन्ने का न्यूनतम मूल्य बढ़ाकर 575 रुपये प्रति क्विंटल करने और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 50 रुपये प्रति किलो निर्धारित करने की मांग की है। संगठन ने केंद्र सरकार की ओर से गन्ना मूल्य और चीनी की कीमतों पर विचार करने के लिए गठित समिति की संरचना पर सवाल उठाते हुए इसमें किसान संगठनों और गन्ना उत्पादक राज्यों को प्रतिनिधित्व देने की मांग की है। गन्ना भाव
- किसान सभा के अनुसार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ना किसानों के आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने
- नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता में समिति गठित की है।
- संगठन ने कहा कि यह फैसला किसानों के संघर्ष का परिणाम है।
- साथ ही, समिति की कार्य-शर्तों और गन्ने की उत्पादन लागत के आकलन पर भी आपत्ति जताई है।

केंद्र सरकार की समिति पर किसान सभा ने उठाए सवाल
- केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों की मांगों और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य
- पर विचार करने के लिए प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता में समिति गठित की है।
- किसान सभा ने समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए उनकी पिछली कृषि नीतियों
- और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से संबंधित समिति में भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
- संगठन का कहना है कि समिति में किसान संगठनों और गन्ना उत्पादक राज्यों की सरकारों को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है।
- किसान सभा ने मांग की है कि समिति की रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर सार्वजनिक की जाए,
- ताकि किसानों को मूल्य निर्धारण से जुड़े निर्णयों की जानकारी मिल सके।
गन्ने का FRP 365 रुपये, लागत के आकलन पर विवाद
- किसान सभा ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की ओर से वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने का उचित
- एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किए जाने पर सवाल उठाए हैं।
- संगठन के मुताबिक, आयोग ने 182 रुपये प्रति क्विंटल की A2+FL लागत
- के आधार पर लगभग 100.5 प्रतिशत मुनाफे का आकलन किया है।
- किसान सभा का दावा है कि 258 रुपये प्रति क्विंटल की C2 लागत को
- आधार बनाने पर मुनाफे का मार्जिन लगभग 41.5 प्रतिशत रह जाता है।
- किसान सभा ने अपनी रिपोर्ट ‘द शुगरकेन प्राइस, डिकोडेड’ में लागत गणना से जुड़ी कई विसंगतियों का उल्लेख किया है।
- संगठन का कहना है कि इन विसंगतियों को ठीक करने पर गन्ने की C2 लागत लगभग 308 रुपये प्रति क्विंटल हो सकती है।
- इन्हीं आकलनों के आधार पर किसान सभा ने गन्ने का मूल्य कम से कम 575 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है।
- संगठन ने यह भी कहा है कि किसी भी स्थिति में कीमत 550 रुपये प्रति क्विंटल से कम नहीं होनी चाहिए।
- इसके अलावा, इथेनॉल और बिजली उत्पादन से होने वाली आय में किसानों को
- कम से कम 57 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त हिस्सा देने की मांग की गई है।
चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग
- किसान सभा ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP of Sugar) में लंबे समय से बदलाव नहीं होने का मुद्दा उठाया है।
- संगठन के अनुसार, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य वर्ष 2019 से 31 रुपये प्रति किलो पर स्थिर है।
- किसान सभा का कहना है कि चीनी की बिक्री कीमत और किसानों को गन्ने का भुगतान करने की मिलों की क्षमता के बीच संबंध है।
- संगठन ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाकर कम से कम 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग की है।
- संगठन ने यह भी दावा किया है कि शीतल पेय और कन्फेक्शनरी कंपनियों को मौजूदा मूल्य व्यवस्था से अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है।
- इस मुद्दे पर किसान सभा ने चीनी उद्योग की मूल्य निर्धारण व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की है।
गेहूं और चने के MSP पर भी सवाल
- किसान सभा ने गन्ने के साथ-साथ गेहूं, चना और अन्य कृषि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण पर भी सवाल उठाए हैं।
- संगठन के अनुसार, रबी विपणन वर्ष 2027-28 के लिए CACP की C2 लागत गणना के आधार पर गेहूं का मूल्य 2,774 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए,
- जबकि घोषित MSP 2,610 रुपये प्रति क्विंटल है।
- इसी तरह, किसान सभा का दावा है कि चने का मूल्य 7,426 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए,
- जबकि घोषित MSP 5,958 रुपये प्रति क्विंटल है। संगठन ने इन आंकड़ों के आधार पर उत्पादन लागत
- और घोषित समर्थन मूल्य के बीच अंतर को लेकर चिंता जताई है।
- किसान सभा ने सभी खरीफ और रबी फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत के आधार पर MSP घोषित करने की मांग दोहराई है।
- संगठन का कहना है कि फसलों की लागत का आकलन करते समय बीज, खाद, श्रम, मशीनरी
- और अन्य कृषि खर्चों को उचित तरीके से शामिल किया जाना चाहिए।
राज्यों के लागत आकलन पर भी आपत्ति
- किसान सभा ने कुछ राज्यों की ओर से कृषि उत्पादन लागत के आकलन में कथित विसंगतियों पर भी सवाल उठाए हैं।
- संगठन के अनुसार, उत्तर प्रदेश में गन्ने की लागत गणना के लिए 800 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादकता मानी गई,
- जबकि वास्तविक उत्पादकता 563 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है।
- किसान सभा का कहना है कि उत्पादकता का अधिक अनुमान लगाने से प्रति क्विंटल उत्पादन लागत कम दिखाई दे सकती है।
- संगठन ने महाराष्ट्र की ओर से गन्ने की उत्पादन लागत का अनुमान नहीं भेजे जाने का भी दावा किया है।
- धान और गेहूं की लागत गणना को लेकर भी किसान सभा ने कई राज्यों के आंकड़ों पर आपत्ति जताई है।
- संगठन के मुताबिक, उत्पादन लागत का सही आकलन किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए जरूरी है।
रंगराजन फॉर्मूला लागू करने की मांग
- किसान सभा ने गन्ना किसानों को चीनी उद्योग से होने वाली कुल आय में उचित हिस्सा दिलाने के
- लिए विस्तारित रंगराजन फॉर्मूला लागू करने की मांग की है। संगठन के अनुसार, चीनी, इथेनॉल, बिजली
- और बायोगैस से प्राप्त कुल मूल्य का 75 प्रतिशत हिस्सा उत्पादकों को दिया जाना चाहिए।
- इसके अतिरिक्त, किसान सभा ने गन्ने के FRP का बकाया भुगतान 15 प्रतिशत ब्याज के साथ करने,
- मशीनी कटाई के नाम पर किसानों से की जाने वाली कटौती बंद करने
- और किसानों की निगरानी में गन्ने की तौल तथा चीनी रिकवरी की जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।
मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
- किसान सभा ने केंद्र सरकार की समिति से मिलने का समय मांगा है।
- संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि समिति का इस्तेमाल किसानों की मांगों पर निर्णय टालने के लिए किया गया,
- तो संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य समान विचारधारा वाले संगठनों के साथ मिलकर चीनी मिलों, मंडियों और गांवों में आंदोलन तेज किया जाएगा।
- फिलहाल, किसान सभा की प्रमुख मांगों में गन्ने का मूल्य 575 रुपये प्रति क्विंटल करना,
- चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 50 रुपये प्रति किलो निर्धारित करना, सभी फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत के आधार पर MSP तय करना
- और गन्ना मूल्य निर्धारण में किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल है।
- इन मांगों पर केंद्र सरकार की समिति की सिफारिशें आगे की नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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Edited by – Riddhima


