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चीन के फैसले से भारत को बड़ी राहत, यूरिया आयात कीमतों में 50% से ज्यादा गिरावट

गांव मंच डेस्क, जयपुर भारत को उर्वरक मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। सरकारी कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) के ताजा यूरिया आयात टेंडर में कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक गिर गई हैं। टेंडर में पूर्वी और पश्चिमी तट के लिए 445 से 449 डॉलर प्रति टन तक की बोलियां मिली हैं। यह कीमत अप्रैल में हुए पिछले अंतरराष्ट्रीय टेंडर की तुलना में काफी कम है। तब भारतीय पोटाश लिमिटेड (IPL) के टेंडर में यूरिया की कीमत 935 से 959 डॉलर प्रति टन तय हुई थी। उर्वरक विभाग, भारत सरकार

चीन के बाजार में लौटने से बदली तस्वीर

विशेषज्ञों के अनुसार कीमतों में यह बड़ी गिरावट चीन के निर्यात बाजार में लौटने से आई है। चीन ने पहले यूरिया निर्यात पर कई प्रतिबंध लगाए थे। हाल ही में उसने निर्यात को कुछ हद तक खोल दिया। इसके बाद वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ गई और कीमतों पर दबाव बना। NFL के 17 लाख टन यूरिया खरीद टेंडर के मुकाबले 62 लाख टन से अधिक की बोलियां मिलीं। इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय

सरकार की सब्सिडी चिंता हो सकती है कम

यह गिरावट केंद्र सरकार के लिए भी राहत भरी खबर है। पश्चिम एशिया संकट के कारण हाल के महीनों में यूरिया और एलएनजी की कीमतें तेजी से बढ़ी थीं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। देश में यूरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस प्रमुख कच्चा माल है। उर्वरक उद्योग भारत की कुल गैस खपत का बड़ा हिस्सा उपयोग करता है। ऐसे में गैस और यूरिया की महंगी कीमतों ने सब्सिडी बोझ बढ़ा दिया था। वित्त मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष में उर्वरक सब्सिडी का खर्च बजटीय अनुमान से काफी अधिक जा सकता है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय

खरीफ सीजन में किसानों को मिलेगा फायदा

यूरिया कीमतों में आई यह नरमी खरीफ सीजन के दौरान किसानों के लिए अच्छी खबर है। कम आयात लागत से सरकार को पर्याप्त भंडार बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे किसानों को नियंत्रित दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराना आसान होगा। हालांकि उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह राहत फिलहाल अगस्त तक रह सकती है। इसके बाद चीन फिर से निर्यात नियंत्रण सख्त करता है या नहीं, इस पर बाजार की दिशा निर्भर करेगी। फिलहाल यूरिया बाजार में आई यह गिरावट भारत के लिए राहत की बड़ी खबर मानी जा रही है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC)

Edited by- Krishika Agarwal

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