जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर की 43वीं कार्यकारिणी के वार्षिक चुनाव से पहले निर्वाचन समिति ने मतदान की पात्रता को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब चुनाव में मतदान करने के इच्छुक अधिवक्ताओं को राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में कम से कम दो पेशियों (Appearances) का रिकॉर्ड अथवा दो वकालतनामों (Vakalatnama) का रिकॉर्ड प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही संबंधित अधिवक्ताओं को शपथ-पत्र (Affidavit) भी देना होगा।
निर्वाचन समिति के इस फैसले को हाईकोर्ट में नियमित रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस निर्णय से उन अधिवक्ताओं के लिए मतदान की पात्रता हासिल करना मुश्किल हो सकता है, जो राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में नियमित प्रैक्टिस नहीं करते हैं।

मतदान के लिए दो पेशियों या दो वकालतनामों का रिकॉर्ड जरूरी
- राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर मंगलवार को बार
- कार्यालय में निर्वाचन समिति की पहली बैठक आयोजित की गई।
- बैठक के बाद समिति की ओर से आधिकारिक नोटिस जारी किया गया।
- नोटिस के अनुसार, मतदान के इच्छुक अधिवक्ताओं को 2 नवंबर 2026 से पहले तक राजस्थान हाईकोर्ट
- की जयपुर पीठ के समक्ष कम से कम दो पेशियों में उपस्थित रहने का रिकॉर्ड अथवा दो वकालतनामे प्रस्तुत करने होंगे।
- निर्वाचन समिति ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची तैयार करने से पहले
- अधिवक्ताओं को निर्धारित रिकॉर्ड के साथ शपथ-पत्र भी जमा करना होगा।
- इसके आधार पर मतदान की पात्रता निर्धारित की जाएगी।
गैर-प्रैक्टिसिंग अधिवक्ताओं की मतदान में भूमिका होगी सीमित?
- दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट में नियमित रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता लंबे समय से मांग करते रहे हैं
- कि बार एसोसिएशन के चुनाव में मतदान का अधिकार वास्तविक रूप से हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने
- वाले अधिवक्ताओं को प्राथमिकता के आधार पर मिलना चाहिए।
- नियमित प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं का तर्क रहा है कि केवल बार एसोसिएशन की सदस्यता या पंजीकरण के आधार
- पर मतदान करने वाले ऐसे अधिवक्ताओं की भूमिका सीमित होनी चाहिए, जो हाईकोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया से नियमित रूप से जुड़े नहीं हैं।
- पिछले कुछ चुनावों में गैर-प्रैक्टिसिंग अधिवक्ताओं की बड़ी संख्या में भागीदारी और चुनावी समीकरणों पर उनके प्रभाव को लेकर भी चर्चा होती रही है।
- कई बार ऐसे मतदाताओं की भूमिका चुनाव परिणामों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी गई है।
- ऐसे में निर्वाचन समिति का यह फैसला आगामी चुनावों में मतदान की प्रक्रिया और चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
- जिन अधिवक्ताओं के पास निर्धारित दो पेशियों या दो वकालतनामों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होगा,
- उनके लिए मतदान की पात्रता साबित करना मुश्किल हो सकता है।
निर्वाचन समिति के फैसले पर अधिवक्ताओं में मिली-जुली प्रतिक्रिया
- निर्वाचन समिति के इस फैसले को लेकर अधिवक्ताओं के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है।
- हाईकोर्ट में नियमित प्रैक्टिस करने वाले कई अधिवक्ता इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं।
- वहीं, कुछ अधिवक्ताओं ने इस पर नाराजगी भी जताई है।
- अधिवक्ताओं के विभिन्न व्हाट्सऐप ग्रुप में भी इस फैसले को लेकर चर्चा और असहमति सामने आई है।
- ऐसे में आगामी चुनाव से पहले मतदान की पात्रता का मुद्दा बार एसोसिएशन के भीतर महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
11 दिसंबर को होगा राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की 43वीं कार्यकारिणी का चुनाव
- राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर की 43वीं कार्यकारिणी के लिए वार्षिक चुनाव 11 दिसंबर 2026 (शुक्रवार) को आयोजित किए जाएंगे।
- गौरतलब है कि सोमवार, 2 नवंबर को बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव ने चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए
- तीन अधिवक्ताओं को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया था। इनमें अधिवक्ता डॉ. पुष्पेन्द्र पाल सिंह, प्रेम शंकर शर्मा और मनीष गुप्ता शामिल हैं।
- नियुक्ति के बाद मंगलवार को तीनों निर्वाचन अधिकारियों ने बार एसोसिएशन कार्यालय में पहली बैठक आयोजित की।
- बैठक में चुनावी टीम के गठन, चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और मतदान प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
- इसके बाद निर्वाचन समिति ने आधिकारिक नोटिस जारी कर मतदान की पात्रता के लिए दो पेशियों अथवा
- दो वकालतनामों का रिकॉर्ड और शपथ-पत्र प्रस्तुत करने की अनिवार्यता घोषित की।
- निर्वाचन समिति के इस निर्णय के बाद राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के आगामी चुनाव में मतदाता पात्रता
- और नियमित प्रैक्टिस का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है।
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Edited by – Krishika Agarwal


