- कभी 0.02 हेक्टेयर का यह खेत कमजोर हो चुका था। लगातार एक ही फसल उगाने से मिट्टी की गुणवत्ता घटी।उपज भी हर साल कम होती गई।
- इस चुनौती को सरोज देवी ने अवसर बनाया।उन्होंने सरोज देवी बहुस्तरीय खेती मॉडल अपनाया।
- इससे खेत की तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
बहुस्तरीय खेती का अनोखा मॉडल
- सरोज देवी ने खेत को अलग तरीके से तैयार किया।ऊपरी स्तर पर पपीता और अमरूद लगाए।
- बीच की जगह में पालक और मिर्च उगाई।नीचे की सतह पर कंद वाली फसलें लगाईं।
- हर स्तर का पूरा उपयोग किया गया।इस मॉडल से भूमि की उत्पादकता बढ़ी।खाली जगह भी उपयोग में आने लगी।

मिट्टी की उर्वरता में हुआ सुधार
- सरोज देवी बहुस्तरीय खेती ने मिट्टी को नई ताकत दी।विभिन्न पौधों ने पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखा।
- जमीन की नमी अधिक समय तक बनी रही।मिट्टी का कटाव भी कम हुआ।जैव विविधता लगातार बढ़ने लगी।
- प्राकृतिक तरीके से खेत मजबूत हुआ।रासायनिक दबाव भी धीरे-धीरे घटा।
पूरे वर्ष मिलती रही उपज
- इस खेती से अलग-अलग मौसम में उत्पादन मिला। फलों की नियमित उपलब्धता बनी रही।
- हरी सब्जियां भी लगातार मिलती रहीं। कंद फसलों ने अतिरिक्त सहारा दिया।
- परिवार को पौष्टिक भोजन मिलता रहा। बाजार पर निर्भरता कम हुई।खाद्य सुरक्षा पहले से मजबूत बनी।
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Edited by- Riddhima


