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राजस्थान में गोलछा ग्रुप ने जगाई प्लास्टिक मुक्त मुहिम की अलख, पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आया कॉर्पोरेट जगत

विश्व पर्यावरण दिवस पर गोलछा फाउंडेशन ट्रस्ट ने बांटे 1000 जूट बैग; जयपुर से लेकर भीलवाड़ा के गांवों तक हरियाली और सामाजिक सरोकार का अनूठा उदाहरण। जसलीन गोलछा सहित ग्रुप के सीईओ दिनेश पुरोहित, बिग्नेश्वर स्वैन और अतुल यादव ने संभाली कमान

गांव मंच डेस्क, जयपुर।

विश्व पर्यावरण दिवस के विशेष अवसर पर मरुधरा की राजधानी जयपुर में कॉर्पोरेट सामाजिक सरोकार (CSR) और जन-जागरूकता का एक बेहतरीन समन्वय देखने को मिला। प्रकृति को सहेजने की अपनी नैतिक जिम्मेदारी को समझते हुए गोलछा परिवार और गोलछा ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारियों व कर्मचारियों ने एकजुट होकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के सबसे बड़े दुश्मन ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ के बढ़ते चलन को रोकना और समाज को टिकाऊ विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना था। गोलछा ग्रुप के कार्यस्थल पर आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में शीर्ष नेतृत्व से लेकर आम कर्मचारियों तक ने प्रकृति को सहेजने के लिए सामूहिक सहभागिता निभाई।

1000 जूट बैग के साथ ‘नो प्लास्टिक’ का शंखनाद

इस मुहिम के तहत गोलछा फाउंडेशन ट्रस्ट की चेयरपर्सन जसलीन गोलछा ने जयपुरवासियों के बीच लगभग 1000 जूट बैग वितरित किए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर नागरिक का एक छोटा सा सकारात्मक बदलाव पर्यावरण को बड़ा जीवनदान दे सकता है। उन्होंने कहा, “यदि हम रोजमर्रा की खरीदारी के समय प्लास्टिक की थैलियों का त्याग कर जूट या कपड़े के थैलों का उपयोग शुरू कर दें, तो जयपुर को बहुत जल्द प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त कराया जा सकता है। विश्व पर्यावरण दिवस पर मरूधरा को प्लास्टिक मुक्त बनाने का संकल्प में जसलीन गोलछा सहित ग्रुप के सीईओ दिनेश पुरोहित, बिग्नेश्वर स्वैन और अतुल यादव सक्रिय रुप से जुड़े है।

बेजुबान जीवों के प्रति दिखाई संवेदनशीलता

इस आयोजन में प्रकृति संतुलन के एक और महत्वपूर्ण पहलू—बेजुबान जीव-जंतुओं की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया। जसलीन गोलछा ने लोगों से मार्मिक अपील की कि इस झुलसा देने वाली गर्मी में अपने घरों और मोहल्लों के बाहर मूक पक्षियों और पशुओं के लिए पानी के परिंडे और बर्तन जरूर रखें। उनका मानना है कि सच्चा पर्यावरण संरक्षण सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी पारिस्थितिकी (Ecosystem) की रक्षा करना है। इसी कड़ी में संस्था द्वारा 150 पौधों का भी वितरण किया गया।

ग्रामीण अंचलों में हरियाली और खुशहाली का भगीरथ प्रयास

कॉर्पोरेट और समाज के साथ आने का यह सुखद परिणाम केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गोलछा परिवार पिछले कई वर्षों से माइनिंग (खनन) क्षेत्रों से जुड़े गांवों के कायाकल्प में जुटा है। उद्योग जगत की इस संवेदनशीलता के कारण पिछले तीन वर्षों में अकेले भीलवाड़ा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में 20 हजार से अधिक पौधे लगाकर एक मिसाल कायम की गई है। इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में होनहार छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप, नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर और दवा वितरण जैसी जनकल्याणकारी गतिविधियां भी निरंतर चलाई जा रही हैं।

जसलीन गोलछा ने विश्वास जताया कि समाज और पर्यावरण सेवा की यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के लिए लगातार जारी रहेगी।

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