गांव मंच, जोधपुर, 3 जून। राजस्थान की पावन धरा पर जल संचयन और पर्यावरण चेतना की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं को उस समय एक नया संबल मिला, जब कार्तिकेय सिंह राठौड़ के नेतृत्व में जोधपुर जिले के ऐतिहासिक बीसलपुर गांव में ‘वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान’ का भव्य आयोजन किया गया। यह अनूठा आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन और पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी का एक सशक्त व प्रेरक संदेश बनकर उभरा है।

“पाणी राखो पत सूं…” लोक संदेश के साथ जुटीं महिलाएं और युवा
मारवाड़ की प्रसिद्ध लोक कहावत “पाणी राखो पत सूं, पत राख्यां सब होय” को आत्मसात करते हुए बीसलपुर और आसपास के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में लोग इस मुहिम से जुड़े। अभियान के दौरान गांव में पारंपरिक और उत्साहपूर्ण माहौल देखा गया, जिसके तहत निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियां आयोजित की गईं:
- भव्य कलश यात्रा व जल पूजन: ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की अगुवाई में पारंपरिक वेशभूषा में कलश यात्रा निकाली गई और स्थानीय जल स्रोतों का वैदिक रीति से पूजन कर उन्हें स्वच्छ रखने का संकल्प लिया गया।
- सामुदायिक श्रमदान: युवाओं और जल योद्धाओं ने मिलकर गांव के प्राचीन तालाबों, बावड़ियों और कैचमेंट एरिया (आगोर) की साफ-सफाई के लिए व्यापक स्तर पर श्रमदान किया।
- वृक्षारोपण कार्यक्रम: भूजल स्तर को सुधारने और पर्यावरण संतुलन के लिए जल स्रोतों के निकट सघन पौधारोपण किया गया।

सरकारी प्रयासों के साथ सामुदायिक सहभागिता जरूरी: कार्तिकेय सिंह राठौड़
अभियान के दौरान जनसमूह और ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए मुख्य संयोजक कार्तिकेय सिंह राठौड़ ने मारवाड़ी लोक संस्कृति के एक और महत्वपूर्ण दोहे को रेखांकित किया:
“मेह रो रुतु आवे एक बार, पाणी राखो संभाल” अर्थात् बारिश का मौसम वर्ष में केवल एक बार ही आता है, इसलिए प्रकृति से मिलने वाले इस अमृत रूपी वर्षा जल को अत्यंत सहेज कर और संभाल कर रखना हमारी जिम्मेदारी है। यह संदेश आज के दौर में केवल एक कहावत नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का एकमात्र महामंत्र बन चुका है। — कार्तिकेय सिंह राठौड़, पर्यावरणविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता

आपसी संवाद के दौरान यह बात प्रमुखता से उभरकर सामने आई कि किसी भी बड़े जल संकट या सूखे का स्थायी समाधान केवल सरकारी योजनाओं के भरोसे संभव नहीं है; इसके लिए जनभागीदारी (Public Participation) और मजबूत सामुदायिक सहभागिता अनिवार्य है। इस पूरे अभियान में मातृशक्ति यानी महिलाओं की सक्रिय और अग्रणी भूमिका ने इस मुहिम को एक व्यापक सामाजिक आधार प्रदान किया है।
अभियान के प्रमुख लक्ष्य और भविष्य का संकल्प
‘वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान’ (रणबांका ट्रस्ट के सहयोग से संचालित) का मुख्य विजन केवल तात्कालिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी लक्ष्य तय किए गए हैं:
- पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन: पश्चिमी राजस्थान की लुप्त होती और गाद से भरी बावड़ियों व तालाबों को दोबारा क्रियाशील बनाना।
- वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting): ग्रामीण क्षेत्रों में ‘टांका’ निर्माण और रूफटॉप हार्वेस्टिंग तकनीकों के प्रति तकनीकी जागरूकता फैलाना।
- हरित आवरण का विस्तार: बंजर और गोचर भूमियों पर स्थानीय वनस्पतियों का विकास कर पर्यावरण संतुलन सुनिश्चित करना।
कार्यक्रम के समापन पर कार्तिकेय सिंह राठौड़ ने इस ऐतिहासिक जनपहल को सफल और अनुकरणीय बनाने वाले सभी ग्रामवासियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, जागरूक युवाओं और अग्रिम पंक्ति के जल योद्धाओं का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस मुहिम को मारवाड़ के कोने-कोने तक ले जाने का अपना दृढ़ संकल्प दोहराया।

- पश्चिमी राजस्थान में वर्षा जल संचयन की पारंपरिक प्रणालियों (जैसे टांका, नाड़ी, खड़ीन) के वैज्ञानिक महत्व और तकनीकी विवरण को समझने के लिए केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI) की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करें।
- राजस्थान सरकार के भूजल प्रबंधन, ‘मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान’ (MJSA) के दिशा-निर्देशों और जल संचयन के लिए मिलने वाले सरकारी अनुदान की जानकारी के लिए जल संसाधन विभाग, राजस्थान सरकार के आधिकारिक वेब पोर्टल पर जाएं।
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नोट:- यह विचार लेखक पत्रकार अंकित तिवारी Ankit Tiwari के है।


