गांव मंच डेस्क, नई दिल्ली | भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। गांवों में करोड़ों परिवारों की रोज़मर्रा की कमाई दूध से चलती है। लेकिन इस बार भीषण गर्मी ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। कई राज्यों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और इसका असर अब दुधारू पशुओं पर भी दिखाई देने लगा है।
कई पशुपालकों का कहना है कि गाय और भैंस पहले की तुलना में कम दूध दे रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बढ़ती गर्मी भारत के रिकॉर्ड दूध उत्पादन को प्रभावित कर सकती है?
3 बड़े बदलाव जो बढ़ा रहे हैं चिंता
- पशु कम खा रहे हैं, दूध भी घट रहा है
विशेषज्ञ बताते हैं कि तेज गर्मी में पशु हीट स्ट्रेस का शिकार हो जाते हैं। इस दौरान वे कम चारा खाते हैं और ज्यादा समय आराम करने में बिताते हैं।
जब पशु पर्याप्त भोजन नहीं करते, तो दूध उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। कई डेयरी किसानों ने हाल के हफ्तों में दूध की मात्रा घटने की शिकायत की है।
- बढ़ रहा है पशुपालकों का खर्च
गर्मी के दिनों में पशुओं को ज्यादा पानी, अतिरिक्त देखभाल और ठंडी जगह की जरूरत होती है।
छोटे पशुपालकों के लिए यह खर्च उठाना आसान नहीं होता। कई किसानों को पंखे, कूलर या पानी के छिड़काव जैसी अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ रही हैं।
- कमाई पर पड़ सकता है सीधा असर
गांवों में दूध को रोज़ की नकद आय का सबसे भरोसेमंद स्रोत माना जाता है।
जब दूध उत्पादन घटता है, तो परिवार की आमदनी भी प्रभावित होती है। यही वजह है कि पशुपालक बढ़ती गर्मी को सिर्फ मौसम की समस्या नहीं, बल्कि आर्थिक चुनौती मान रहे हैं।
एक किसान की चिंता, लाखों परिवारों की कहानी
देश के कई हिस्सों में पशुपालक महसूस कर रहे हैं कि गर्मी का असर उनके पशुओं की सेहत पर पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि पशु पहले जितना चारा नहीं खा रहे। कुछ जगहों पर दूध उत्पादन में भी कमी दर्ज की गई है। यह स्थिति बताती है कि जलवायु परिवर्तन अब खेतों के साथ-साथ डेयरी क्षेत्र को भी प्रभावित कर रहा है।
पशुपालक अभी क्या कर सकते हैं?
- छायादार शेड की व्यवस्था करें
पशुओं को सीधे धूप से बचाना जरूरी है। पेड़ों की छाया या जाल वाले शेड काफी मदद कर सकते हैं।
- पानी की कमी न होने दें
गर्मी में पशुओं को बार-बार साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराएं।
- हरा चारा बढ़ाएं
हरा चारा पशुओं को पोषण के साथ नमी भी देता है, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
- सुबह-शाम खिलाएं चारा
ठंडे समय में पशु बेहतर तरीके से भोजन करते हैं और तनाव भी कम महसूस करते हैं।
गांवों की अर्थव्यवस्था के लिए क्यों जरूरी है यह मुद्दा?
खेती साल में एक या दो बार आय देती है। लेकिन दूध ऐसा जरिया है, जिससे रोज़ कमाई होती है।
कई परिवारों की रसोई, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्च दूध की आय पर निर्भर करते हैं। इसलिए दूध उत्पादन में गिरावट का असर सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
सिर्फ गर्मी नहीं, भविष्य की चेतावनी
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में हीटवेव की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
ऐसे में डेयरी क्षेत्र को केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि पशुओं को गर्मी से बचाने पर भी ध्यान देना होगा। बेहतर शेड, आधुनिक तकनीक और जागरूकता ही इस चुनौती से निपटने का रास्ता बन सकती है।
भारत ने दूध उत्पादन में रिकॉर्ड बनाया है। अब असली चुनौती इस रिकॉर्ड को बढ़ती गर्मी के बीच बनाए रखने की है। आने वाले समय में यही तय करेगा कि देश का डेयरी सेक्टर कितना मजबूत और टिकाऊ बन पाता है।


