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उत्तर भारत में जानवरों के डर से बदल रही खेती की तस्वीर

गांव मंच डेस्क,नई दिल्ली। उत्तर भारत में बढ़ता मानव-पशु संघर्ष अब केवल वन्यजीव संरक्षण या पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है। इसका सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ने लगा है। खेतों में जंगली सूअर, नीलगाय, बंदर और आवारा पशुओं के बढ़ते हमलों से परेशान किसान अब अपनी खेती की रणनीति बदलने पर मजबूर हो रहे हैं। हाल ही में जारी “स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट 2026 इन फिगर्स” रिपोर्ट में इस गंभीर समस्या को उजागर किया गया है।

मुनाफे वाली खेती छोड़ रहे किसान

रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड के कई इलाकों में किसान ऐसी फसलों की खेती कम कर रहे हैं, जिन्हें जानवर आसानी से नुकसान पहुंचाते हैं। पहले जहां किसान सब्जियां, फल, दलहन और अन्य नकदी फसलें उगाकर अच्छा मुनाफा कमाते थे, वहीं अब वे ऐसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं जिन्हें जंगली या आवारा पशु कम नुकसान पहुंचाते हैं। इससे किसानों की आय पर भी असर पड़ रहा है। Centre for Science and Environment (CSE)

रातों की नींद उड़ाने लगी फसल सुरक्षा की चिंता

ग्रामीण इलाकों में कई किसान रातभर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद कई बार एक ही रात में पूरी फसल बर्बाद हो जाती है। किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि फसल बचाने की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में खेती का जोखिम पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।

बदल रहा है उत्तर भारत का कृषि भूगोल

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो उत्तर भारत का कृषि भूगोल पूरी तरह बदल सकता है। फसल पैटर्न में हो रहे बदलाव से न केवल किसानों की आय प्रभावित होगी, बल्कि खाद्य उत्पादन और कृषि बाजारों पर भी असर पड़ सकता है। कई क्षेत्रों में किसान अब “मजबूरी की खेती” करने लगे हैं, जहां फसल का चुनाव बाजार की मांग नहीं बल्कि जानवरों से बचाव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। फसलों को वन्यजीवों से होने वाले नुकसान पर विस्तृत रिपोर्ट

समाधान की दिशा में ठोस कदम जरूरी

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या के समाधान के लिए सरकारों को फसल सुरक्षा, प्रभावी मुआवजा व्यवस्था, पशु नियंत्रण और सामुदायिक संरक्षण योजनाओं पर तेजी से काम करना होगा। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि के लिए और बड़ी चुनौती बन सकता है। MoEFCC Official Website

Edited by- Krishika Agarwal

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