गाँव मंच डेस्क, पंजाब के फाजिल्का के खिप्पनवाली गांव के किसान हरभिंदर सिंह संधू की कहानी प्रेरक है। उन्होंने खेती में कई बड़े उतार-चढ़ाव देखे हैं। एक समय परिवार पर 5-6 करोड़ रुपये का कर्ज था। इसके बाद भी उन्होंने खेती छोड़ने का फैसला नहीं किया।
फसलें बदलीं, लेकिन मुश्किलें जारी रहीं
- परिवार के किन्नू बाग जलभराव से बर्बाद हो गए। इसके बाद संधू ने गन्ने की खेती शुरू की।
- उत्पादन अच्छा रहा, लेकिन भुगतान में देरी हुई। इससे कार्यशील पूंजी की समस्या बढ़ी। परिवार पर भारी कर्ज चढ़ गया।
- इसके बाद उन्होंने बीटी कपास की खेती की। शुरुआत में इससे नुकसान की भरपाई हुई।
- साल 2015 में सफेद मक्खी के प्रकोप ने फिर मुश्किल बढ़ा दी। संधू ने कपास की व्यावसायिक खेती छोड़ दी।
भेड़ पालन से बदली खेती की तस्वीर
- साल 2018 में संधू ने एग्रोफॉरेस्ट्री पर ध्यान दिया। उन्होंने शुरुआत पांच से छह एकड़ से की।
- छह वर्षों में यह क्षेत्र करीब 30 एकड़ तक पहुंच गया। साल 2021 में उन्होंने व्यावसायिक भेड़ पालन शुरू किया।
- इसके लिए उन्होंने मथुरा स्थित केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान का दौरा किया। वहां से उन्होंने आठ अर्ध-वयस्क भेड़ें खरीदीं। ICAR-CIRG
बच्चों ने खेती को बनाया अपना करियर

संधू के तीनों बच्चे उच्च शिक्षा ले चुके हैं। वे अपने पेशे के साथ फार्म से भी जुड़े हैं। परिवार सुबह पांच बजे फार्म पर काम शुरू करता है। बच्चों के अनुसार खेती उनके लिए नौकरी नहीं है। यह उनके परिवार का जुनून है। वे पशु टीकाकरण और प्रजनन प्रबंधन भी सीख चुके हैं। फार्म पर पंजाब कजला, यमुनापारी और स्थानीय नस्लें हैं। यहां बेहतर प्रजनन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। फार्म हर साल 250-300 प्रजनन पशु बेचता है।
Edited by- Krishika Agarwal


