गाँव मंच डेस्क जयपुर, 7 अप्रैल | मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चर्चाओं में साफ दिख रहा है। राजस्थान में भी गैस और ईंधन को लेकर तरह तरह की बातें सामने आईं, खासकर सोशल मीडिया पर गैस बंद होने जैसे दावे तेजी से फैले। इसी पृष्ठभूमि में जयपुर में हुई प्रेस वार्ता में सरकार और तेल कंपनियों ने स्थिति स्पष्ट की। पहली नजर में यह संकट जैसा माहौल लगता है, लेकिन आंकड़ों को देखें तो तस्वीर थोड़ी संतुलित नजर आती है। सप्लाई बनी हुई है, लेकिन दबाव बढ़ा है और उसी का असर जमीन पर दिख रहा है।
पेट्रोल और डीजल को लेकर स्थिति सामान्य
प्रेस वार्ता में मनोज गुप्ता, कार्यकारी निदेशक एवं राज्य प्रमुख, राज्य स्तरीय समन्वयक (तेल उद्योग), राजस्थान ने साफ किया कि पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। मनोज गुप्ता ने कहा कि राज्य में तेल कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और सभी पेट्रोल पंप नियमित रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सप्लाई बनाए रखने के लिए राज्य में कई डिपो और वितरण केंद्र लगातार सक्रिय हैं। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर किसी तरह का तत्काल दबाव नहीं है और एयर फ्यूल के लिए भी लगभग 30 दिन का स्टॉक मौजूद है। यह संकेत देता है कि फिलहाल इस हिस्से में कोई आपात स्थिति नहीं है।

LPG में स्टॉक पर्याप्त, लेकिन बैकलॉग बढ़ा
एलपीजी को लेकर तस्वीर थोड़ी अलग है। सरकार का कहना है कि घरेलू गैस की कमी नहीं है, लेकिन मांग अचानक बढ़ने से वितरण पर दबाव आया है। मनोज गुप्ता ने कहा कि राजस्थान में करीब 1.85 करोड़ एलपीजी उपभोक्ता हैं और उनके लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि हर दिन लगभग 3 लाख सिलेंडर की बुकिंग हो रही है और लगभग उतनी ही सप्लाई भी की जा रही है, लेकिन बढ़ी हुई मांग के कारण बैकलॉग बन गया है। इसी वजह से कई जगहों पर 4 से 7 दिन की देरी देखने को मिल रही है। इस स्थिति को संभालने के लिए बुकिंग के बीच अंतर तय किया गया है, जिसमें शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का अंतर रखा गया है। इसका उद्देश्य सप्लाई को संतुलित रखना है ताकि सभी उपभोक्ताओं तक गैस पहुंच सके।
कमर्शियल गैस पर असर, छोटे कारोबार प्रभावित
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सप्लाई को प्राथमिकता देने के कारण कमर्शियल गैस पर असर पड़ा है। मनोज गुप्ता ने कहा कि होटल और रेस्टोरेंट को फिलहाल उनकी सामान्य जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत ही गैस दी जा रही है। इसका असर सीधे छोटे व्यवसायों पर दिख रहा है। कई ढाबों और फूड स्टॉल्स पर खाने की कीमतों में 20 से 50 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। यह बदलाव धीरे धीरे बाजार में महसूस किया जा रहा है।हालांकि, अस्पताल, शिक्षा संस्थान और हॉस्टल जैसी आवश्यक सेवाओं को पूरी सप्लाई दी जा रही है, जिससे जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों।
गाँव मंच के साथ इंटरव्यू में क्या बोले मनोज गुप्ता
इंटरव्यू के दौरान जब सोशल मीडिया पर चल रही गैस बंदी की खबरों पर सवाल किया गया, तो मनोज गुप्ता ने इसे पूरी तरह गलत बताया मनोज गुप्ता ने कहा कि पेट्रोल और डीजल को लेकर किसी तरह की कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। एलपीजी को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि सप्लाई जारी है, लेकिन मांग ज्यादा होने से देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि रोजाना की सप्लाई और बुकिंग लगभग बराबर है, इसलिए स्थिति नियंत्रण में है, हालांकि कुछ समय के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। मजदूर वर्ग को लेकर उन्होंने कहा कि 5 किलो के छोटे सिलेंडर उपलब्ध हैं और कोई भी श्रमिक पहचान पत्र दिखाकर इन्हें ले सकता है। यह कदम उन लोगों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है जो अस्थायी रूप से काम के लिए शहरों में रहते हैं।
कालाबाजारी पर कार्रवाई और निगरानी
सरकार ने सप्लाई व्यवस्था को बनाए रखने के साथ साथ कालाबाजारी पर भी सख्ती दिखाई है। अब तक 5000 से अधिक छापे मारे जा चुके हैं और 5000 से ज्यादा सिलेंडर जब्त किए गए हैं। कई मामलों में एफआईआर भी दर्ज की गई है। डिलीवरी को पारदर्शी बनाने के लिए कोड आधारित प्रणाली लागू की गई है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि गैस सही उपभोक्ता तक पहुंचे।
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-Deepanshu Kasera, Journalist


