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शाही लीची की खेती: 12 पेड़ों से 3 टन उत्पादन कर केरल के वायनाड जिले के किसान ने पेश की मिसाल

गांवमंच डेस्क, केरल भारत में लीची की खेती का नाम आते ही सबसे पहले बिहार का ख्याल आता है

  • लेकिन अब केरल के वायनाड जिले के एक किसान ने इस धारणा को चुनौती देते हुए एक नई मिसाल कायम की है।
  • 74 वर्षीय किसान कुरुविला जोसेफ ने अपनी सूझबूझ और नवाचार के दम पर शाही लीची की खेती में ऐसी सफलता हासिल की है, जिसने कृषि वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है।
  • जोसेफ ने मात्र 12 शाही लीची के पेड़ों से करीब 3 टन फल उत्पादन लेकर एक उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है।
  • खास बात यह है कि उन्होंने यह सफलता ऐसे क्षेत्र में हासिल की है, जहां की जलवायु पारंपरिक रूप से लीची उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती।

सिंचाई रोककर अपनाई अनोखी तकनीक

  • कुरुविला जोसेफ की सफलता के पीछे उनकी विशेष कृषि तकनीक को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।
  • उन्होंने दिसंबर महीने से अपने लीची के पेड़ों को लगभग तीन महीने तक पानी देना पूरी तरह बंद कर दिया।
  • इस प्रक्रिया से पेड़ एक तरह की “सुप्त अवस्था” (Dormant State) में चले जाते हैं।
  • इसके बाद मार्च में दोबारा सिंचाई शुरू की जाती है। पानी मिलने पर पेड़ों में तेजी से फूल आने लगते हैं, जिससे फल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक पौधों को प्राकृतिक तनाव देकर अधिक फूल और फल विकसित करने में मदद करती है।

वायनाड के किसान कुरुविला जोसेफ अपने शाही लीची के बाग में भरपूर फल से लदे पेड़ों के बीच खड़े हैं, जहां उन्होंने 12 पेड़ों से 3 टन उत्पादन हासिल किया।

शोधकर्ताओं के लिए बना अध्ययन का विषय

जोसेफ के खेत में मिली इस असाधारण सफलता ने कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से कृषि वैज्ञानिक और शोधकर्ता उनके खेत का दौरा कर रहे हैं।

विशेषज्ञ यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि किस प्रकार पश्चिमी घाट की उष्णकटिबंधीय जलवायु में शाही लीची की खेती को सफल बनाया गया। यदि यह मॉडल बड़े स्तर पर अपनाया जाता है, तो देश के कई गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में भी लीची उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

किसानों के लिए प्रेरणा बनी यह उपलब्धि

कुरुविला जोसेफ की कहानी बताती है कि खेती में नवाचार और वैज्ञानिक सोच अपनाकर असंभव लगने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। उनकी सफलता उन किसानों के लिए प्रेरणा है जो नई फसलों और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

कृषि क्षेत्र के लिए क्या है संदेश?

बदलती जलवायु और खेती की बढ़ती चुनौतियों के बीच यह उदाहरण दर्शाता है कि सही प्रबंधन और प्रयोगधर्मी सोच से फसलों की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है। शाही लीची की खेती में जोसेफ का यह मॉडल भविष्य में कई किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।

अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
https://icar.org.in/

https://nhb.gov.in

Edited by – Riddhima

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