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पांचना बांध से पानी के लिए किसानों का बड़ा आंदोलन, दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग हुआ जाम

गांवमंच डेस्क | सवाई माधोपुर में किसान पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर पिछले 12 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं।

  • सवाई माधोपुर किसान आंदोलन लगातार चर्चा में बना हुआ है।
  • पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर किसान पिछले 12 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं।
  • मांगें पूरी नहीं होने पर किसानों ने दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग जाम कर दिया।

12 दिन से चल रहा था धरना, नहीं निकला समाधान

  • राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में किसानों का आंदोलन अब बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गया है।
  • पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर किसान पिछले 12 दिनों से आंदोलन कर रहे थे।
  • किसानों का कहना है कि समय पर सिंचाई का पानी नहीं मिलने से उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं और खरीफ सीजन की तैयारियां भी मुश्किल हो गई हैं।

महापंचायत के बाद बढ़ा आंदोलन

  • मंगलवार को खंडीप क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान एक महापंचायत में जुटे।
  • किसानों ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रशासन और अधिकारियों के सामने अपनी मांग रखी, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
  • लगातार इंतजार और बातचीत के बावजूद जब उनकी मांग पूरी नहीं हुई, तो आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया।

रेलवे ट्रैक पर पहुंचे किसान

  • महापंचायत के बाद हजारों किसान दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए और रेल मार्ग जाम कर दिया।
  • यह देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक माना जाता है।
  • किसानों के ट्रैक पर बैठने से रेल यातायात प्रभावित हुआ और प्रशासन में हड़कंप मच गया।
  • सूचना मिलते ही रेलवे और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत शुरू की।

किसानों की मांग

  • किसानों की मुख्य मांग है कि पांचना बांध से नहरों में तुरंत पर्याप्त पानी छोड़ा जाए, ताकि फसलों की सिंचाई हो सके।
  • उनका कहना है कि यदि समय पर पानी नहीं मिला तो फसलों को नुकसान होगा और किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

समाधान का इंतजार

  • फिलहाल प्रशासन किसानों को समझाने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है।
  • हालांकि खबर लिखे जाने तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई थी।
  • किसानों ने भी साफ संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन आगे और तेज किया जा सकता है।

लेखिका: तनु रूंगटा

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