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फूड बिजनेस को बड़ी राहत: अब लाइसेंस की झंझट कम, कारोबार होगा आसान

गांव मंच डेस्क, जयपुर देशभर के छोटे और बड़े खाद्य कारोबारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने फूड लाइसेंस और पंजीकरण से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने लाइसेंस प्रणाली को पहले से अधिक सरल और सुविधाजनक बनाया है। नए नियमों के तहत अब खाद्य कारोबारियों को हर पांच साल में लाइसेंस नवीनीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी। इससे समय, पैसा और कागजी प्रक्रियाओं का बोझ काफी कम होगा।

अब स्थायी होगा फूड लाइसेंस

  • नई व्यवस्था में फूड लाइसेंस को स्थायी स्वरूप दिया गया है। पहले कारोबारियों को तय अवधि पूरी होने पर लाइसेंस रिन्यू कराना पड़ता था।
  • इस प्रक्रिया में कई दस्तावेज जमा करने होते थे। अब यह परेशानी खत्म हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे लाखों व्यापारियों को राहत मिलेगी।
  • साथ ही प्रशासनिक कार्य भी आसान होंगे। FSSAI के अनुसार यह कदम कारोबार को सुगम बनाने की दिशा में उठाया गया है।

सिंगल विंडो सिस्टम से होगा आसान पंजीकरण

  • सरकार ने पंजीकरण प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने का फैसला किया है।
  • अब खाद्य कारोबारियों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एक ही मंच पर जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जा सकेंगी।
  • इससे स्ट्रीट वेंडर्स, ढाबा संचालक, होटल, रेस्टोरेंट और छोटे खाद्य उद्यमियों को विशेष लाभ मिलेगा। पंजीकरण में लगने वाला समय भी पहले की तुलना में काफी कम हो जाएगा।

केंद्रीय लाइसेंस की सीमा बढ़ी

  • FSSAI ने केंद्रीय लाइसेंस की पात्रता सीमा में भी बड़ा बदलाव किया है। पहले जिन खाद्य इकाइयों का वार्षिक कारोबार 12 लाख रुपये से 30।
  • करोड़ रुपये के बीच था, उन्हें अलग श्रेणियों में लाइसेंस लेना पड़ता था। अब केंद्रीय लाइसेंस की सीमा 30 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दी गई है।
  • इससे मध्यम स्तर के खाद्य उद्योगों को अधिक सुविधा मिलेगी। कारोबार बढ़ाने की प्रक्रिया भी आसान होगी।

निवेश बढ़ेगा, उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार

  • व्यापारिक संगठनों और खाद्य उद्योग विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है।
  • उनका कहना है कि लाइसेंस प्रक्रिया सरल होने से नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा। छोटे कारोबारियों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
  • इससे खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन भी बेहतर होगा। अनुमान है कि देश के 60 लाख से अधिक खाद्य कारोबारी इन सुधारों से लाभान्वित होंगे।
  • सरकार का उद्देश्य “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” को मजबूत करना और खाद्य उद्योग को नई गति देना है।
  • आने वाले समय में ये बदलाव भारत के खाद्य क्षेत्र को अधिक संगठित, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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Edited by- Krishika Agarwal

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