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हीट स्ट्रेस से घट रही डेयरी गायों की प्रजनन क्षमता, किसानों के लिए बढ़ी नई चुनौती

गांव मंच डेस्क, जयपुर डेयरी पशुपालन में प्रजनन क्षमता की समस्या अक्सर पोषण, आनुवंशिकी और ऊर्जा संतुलन से जोड़ी जाती है। लेकिन अब हीट स्ट्रेस भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ता तापमान और अधिक नमी गायों की गर्भधारण क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं। इसका असर दूध उत्पादन और पशुओं के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।

18-20 डिग्री तापमान पर भी शुरू हो सकता है हीट स्ट्रेस

CAFRE की डेयरी सलाहकार एम्मा नेविल के अनुसार, अधिक दूध देने वाली गायें ज्यादा चयापचयी गर्मी पैदा करती हैं। 35 से 50 लीटर प्रतिदिन दूध देने वाली गायों में 18 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी हीट स्ट्रेस शुरू हो सकता है। यह स्थिति तब बनती है जब शरीर में बनने वाली गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। इससे सांस लेने की गति बढ़ती है और चारा सेवन कम हो जाता है।

प्रजनन प्रक्रिया पर पड़ता है सीधा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि हीट स्ट्रेस कई प्रजनन प्रक्रियाओं को बाधित करता है। इससे अंडाशय का विकास प्रभावित होता है। हीट में आने के संकेत कमजोर पड़ जाते हैं। अंडोत्सर्जन में देरी होती है और अंडाणुओं की गुणवत्ता घटती है। इसके कारण गर्भधारण दर कम होती है और भ्रूण हानि का खतरा बढ़ जाता है। शोध बताते हैं कि एक बार हीट स्ट्रेस होने पर सामान्य प्रजनन क्षमता लौटने में दो से तीन प्रजनन चक्र लग सकते हैं।

नॉर्दर्न आयरलैंड जैसे क्षेत्रों में भी बढ़ा खतरा

हालांकि नॉर्दर्न आयरलैंड में अत्यधिक गर्मी कम पड़ती है, लेकिन वहां नमी का स्तर अधिक रहता है। इसी कारण वहां भी हीट स्ट्रेस की घटनाएं बढ़ रही हैं। तापमान-आर्द्रता सूचकांक (THI) 68 से ऊपर पहुंचते ही हल्का हीट स्ट्रेस शुरू माना जाता है। खराब वेंटिलेशन वाले शेडों में यह स्तर आसानी से पार हो जाता है।

इन संकेतों को नजरअंदाज न करें किसान

हीट स्ट्रेस के दौरान गायों का सूखा चारा सेवन 10 से 30 प्रतिशत तक घट सकता है। पानी की खपत बढ़ जाती है। सांस लेने की दर 40 से 60 बार प्रति मिनट तक पहुंच सकती है। पशु कम समय तक बैठते हैं और ठंडी जगहों की तलाश करते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शेड में बेहतर वेंटिलेशन, पंखों का उपयोग, स्वच्छ पानी की उपलब्धता और कम भीड़भाड़ जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हैं।

सही प्रबंधन से बचाया जा सकता है नुकसान

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म मौसम में उच्च गुणवत्ता वाला पाच्य आहार देना चाहिए। चारा ठंडे समय में खिलाना बेहतर रहता है। चराई आधारित प्रणालियों में छाया और पर्याप्त पानी की व्यवस्था जरूरी है। समय रहते प्रबंधन उपाय अपनाकर किसान प्रजनन क्षमता और दूध उत्पादन दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं।

Edited by- Krishika Agarwal



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