गांव मंच डेस्क, कोलकाता पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के कृषि निर्यात पर दिखने लगा है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सीमित करने की घोषणा के बाद बासमती चावल और चाय निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में गिना जाता है। भारत से खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले बड़े हिस्से का निर्यात इसी मार्ग से होता है। ऐसे में किसी भी तरह की रुकावट सीधे व्यापार को प्रभावित कर सकती है।
बासमती चावल की कीमतों में 5-10% गिरावट संभव
- भारतीय चावल निर्यातक महासंघ के अनुसार, हाल ही में अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरों के बाद निर्यातकों ने बासमती की खरीद बढ़ा दी थी।
- इससे कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक तेजी आई थी। लेकिन अब नई अनिश्चितता के कारण बाजार का रुख बदल सकता है।
- उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि बासमती चावल की कीमतों में 5 से 10 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।
- निर्यात आदेश धीमे पड़ने से घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ सकती है, जिसका असर किसानों और व्यापारियों दोनों पर पड़ेगा।
खाड़ी देशों पर अधिक निर्भर है भारतीय बासमती निर्यात
- भारत दुनिया का सबसे बड़ा बासमती उत्पादक और निर्यातक देश है।
- वैश्विक बासमती निर्यात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 85 प्रतिशत है।
- कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों को जाता है।
- अकेले ईरान भारतीय बासमती का प्रमुख खरीदार है।
- उद्योग रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम एशियाई देशों की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक है।
- ऐसे में होर्मुज मार्ग में किसी भी बाधा का सीधा असर भारतीय निर्यात पर पड़ना स्वाभाविक है।

चाय उद्योग भी दबाव में, बढ़ सकती है परिवहन लागत
- सिर्फ बासमती ही नहीं, भारतीय चाय निर्यातकों की भी मुश्किलें बढ़ रही हैं।
- उद्योग संगठनों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव से भुगतान, शिपमेंट और लॉजिस्टिक्स प्रभावित हो सकते हैं।
- यदि स्थिति लंबी चली तो माल ढुलाई दरों और बीमा लागत में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
- इसका असर भारतीय चाय की प्रतिस्पर्धात्मकता पर पड़ सकता है।
- कई निर्यातक फिलहाल नए सौदों को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।
आगे क्या रहेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो निर्यात में और गिरावट आ सकती है। इससे किसानों को मिलने वाले दाम प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, व्यापार जगत को उम्मीद है कि कूटनीतिक प्रयासों से समुद्री मार्गों पर स्थिरता लौटेगी और निर्यात गतिविधियां फिर से पटरी पर आएंगी। फिलहाल बासमती और चाय उद्योग की नजर पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों पर टिकी हुई है।
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Edited by- Krishika Agarwal


