गाँव मंच डेस्क जयपुर, 13 अप्रैल | राजस्थान में 2 साल पहले तक पेपर माफिआओं का बोलबाला था। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना जैसे आम बात हो गई थी लेकिन अब वक्त बदल चूका है| 5 और 6 अप्रैल को संपन्न हुई सुब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा-2026 में ये साबित हो गया है की भजनलाल शर्मा की सरकार में पेपर माफिआओं की खैर नहीं है।
SI भर्ती 2021 बनाम 2026:
क्या बदला?
- 2021 की भर्ती में स्ट्रांग रूम तक से पेपर लीक हुए थे, डमी कैंडिडेट बैठे और ब्लूटूथ से जमकर नक़ल हुई।
- नतीजा ये रहा की पूरी भर्ती परीक्षा रद्द करनी पड़ी लेकिन 2026 में ‘SOG’ की सूझबुझ से माफिआओं के मनसूबे धराशाही हो गए।
- इस बार 7.35 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। लेकिन ब्लूटूथ या डमी कैंडिडेट का एक भी मामला सामने नहीं आया।

ये था SOG का मास्टर प्लान –
- इनपुट आधारित स्ट्राइक: परीक्षा के पहले ही SOG ने मुखबीरो को एक्टिव किया और फील्डिंग जमकल 15 वांटेड अपराधियों को धर दबोचा।
- ब्लूटूथ पर डिजिटल निगरानी: पहली बार 1000 से ज़यादा मोबाइल टावर्स को सर्विलांस पर लिया गया। एग्जाम सेंटर्स के 500 मीटर के दायरे में WiFi और साइबर कैफ़े बंद करवाए गए।
- पेपर डिलेवरी का नया तरीका: पहले पेपर परीक्षा के 3 घंटे पहले सेंटर्स पर पहुंचते थे। इस बार अभ्यर्थी जब क्लास में पहुंच गए, उसके बाद उसके बाद पेपर भेजे गए।
- इनाम की घोषणा: नक़ल गिरोह की जानकारी देने वालो को 1 लाख के इनाम ने माफिआओं ने दर पैदा कर दिया।
- 26 झीलों में 26 विशेष टीमें- ADG विशाल बंसल और DIG परिस देशमुख के नेतृत्व में सोग के नोडल अधिकारीयों ने खुद कमान संभाली।

युवाओं के भविष्य पर जीरो टॉलरेंस नीति:
- पुराने राजस्थान में पेपर माफिया, युवाओं के सपना का सौदा कर लेते थे|
- लेकिन भजनलाल सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति नीति ने अभ्यर्थियों को जीत दिला दी।
- जोधपुर से लेकर जयपुर तक, वांटेड अपराधियों की धरपकड़ बताती है की अब सिस्टम माफिआओं से 2 कदम आगे है।
“इस मामले में अधिक जानकारी के लिए आप RPSC की आधिकारिक वेबसाइट भी देख सकते हैं।”
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– Deepanshu Kasera, Journalist


