गांव मंच डेस्क जैसलमेर / बाड़मेर, 13 अप्रैल | बारमेर डिस्ट्रिक्ट के India – Pakistan बॉर्डर पर स्थित सुंदरा गाओं में अब नर्मदा कैनाल का साफ़ पानी पहुँच चूका है। इस अचीवमेंट के बाद गाओं में ख़ुशी का माहौल बन गया और लोग इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा बदलाव मान रहे है।
1734 से बसा गाओं , पानी की कमी बानी बड़ी समस्या !
सुंदरा गाओं की स्थापना 1734 में हुई थी और यह एरिया के हिसाब से काफी बड़ा ग्राम पंचायत भी मन जाता है। यहाँ के लोग सालों तक खरे ग्राउंडवाटर पर निर्भर रहे , जो पीने लायक नहीं था और कई बार पशु भी उसे नहीं पीते थे।

हर घर नल कनेक्शन से मिला क्लीन ड्रिंकिंग वाटर !
आज़ादी के बाद पहली बार सुंदरा के हर घर में नल से साफ़ पीने का पानी पहुँचाया गया है। इससे पहले लोगों को रोज़ाना कई किलोमीटर दूर जा कर पानी लाना पड़ता था।, जिसमें सबसे ज़्यादा मुश्किल महिलाओं और बच्चों को होती थी।
पाइपलाइन प्रोजेक्ट ने डेजर्ट विलेज तक पहुँचाया पानी !
नर्मदा कैनाल का पानी Madhya Pradesh के Amarkantak हिल्स से चल कर 728 Km का सफर तय करते हुए सुंदरा तक आया है। इंजीनियरिंग टीम्स ने रेगिस्तानी इलाक़ों और टफ टेर्रिन के बावजूद पाइपलाइन नेटवर्क कम्पलीट किया , जिससे बॉर्डर विल्लगेस को स्टेबल वाटर सप्लाई मिल सके।
पानी के आने से लोगों को मिली बड़ी रहत !
पहले गाओं के लोग पानी की तलाश में दूर तक जाया करते थे और कभी कभी पूरा दिन इसी काम में निकल जाता था। और अब घर के बहार ही नल से पानी मिलने पर लोगों का समय बचता है और डेली लाइफ पहले से ज़्यादा आसान हो गयी है।

Health और Developmemt के लिए नयी उम्मीद !
साफ़ पानी की उपलब्धता से गाओं में health problems कम होने की उम्मीद है और लोगों को बेहतर जीवन मिलेगा। गाओं वालो का मानना है की आने वाले समय में पानी की सुविधा से पशुपालन , खेलती और overall development को भी काफी फायदा मिलेगा।
“यह परियोजना Jal Jeevan Mission के तहत भी जुड़ी मानी जा रही है, जिसकी अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।”
राजस्थान में पंचायतों, ग्राम सभाओं और ग्रामीण योजनाओं से जुड़ी ताज़ा खबरें गाँव मंच के गाँव मंच सेक्शन में भी उपलब्ध हैं।
-Vishakha Mehra , Journalist


