गाँव मंच डेस्क दिल्ली, 13 अप्रैल | महिला आरक्षण 816 सीट का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। मोदी सरकार संसद में महिलाओं के लिए बड़ी संख्या में सीट आरक्षित करने की तैयारी में है, जिसे देश की राजनीति में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दिल्ली के ‘नारी शक्ति वंदन सम्मलेन’ में आज देश की महिलाओं के लिए एक नई सुबह का एलान किया है। दशकों से अटका महिला आरक्षण अब हकीकत बनने जा रहा है। सरकार ने 16,17,18 अप्रैल 2026 को संसद का एक विशेष सत्र बुलाया है , जिसमे इस कानून को लघु करने के लिए संवैधानिक बदलाव किये जाएंगे।
‘मैं गृहस्थ नहीं, लेकिन बहनों का दर्द समझता हूँ’ पीएम मोदी:
- बड़ा फैसला: सम्मलेन को सम्बोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा की भारत 21वी सदी का सबसे बड़ा फैसला लेने जा रहा है।
- माँ की मजबूती, परिवार की खुशहाली: उन्होंने कहा “मैं गृहस्थ नहीं हूँ लेकिन जानता हूँ की जब एक माँ आर्थिक रूप से मजबूत होती है, तो पूरा परिवार मजबूत होता है”। उन्होंने उज्ज्वला योजना और लखपति दीदी जैसी योजनाओं का ज़िक्र करते हुए कहा की महिलाओं को अब सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता बनना है।

संसद सत्र में बड़े बदलाव की घोषणा
संसद के 3 दिवसीय विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर ये बड़े बदलाव प्रस्तावित है।
- सीटों का विस्तार: लोकसभा की सीट 543 से बढाकर 816 करने की योजना है।
- महिला कोटा: इन बढ़ी हुई सीटों में से 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होगी।
- 2011 की जनगणना: जनगणना में देरी के कारण अब 2011 के आंकड़ों पर ही सीटों का बंटवारा किया जाएगा।
- 2029 का लक्ष्य: सरकार की पूरी कोशिश है की 2029 लोकसभा चुनाव तक यह आरक्षण ज़मीन पर लागु हो जाए।
ग्रामीण भारत पर असर:
PM मोदी ने पंचायतो में 14 लाख से ज़्यादा महिला प्रतिनिधियों की सफलता का ज़िक्र किया। उन्होनें कहा की जब महिलाएं फैसले लेती है, तो व्यवसाय में संवेदनशीलता आती है। अब यही शक्ति गावों के चौपाल से निकल कर सीधे देश की संसद तक पहुंचेगी।

योजनाओं से मिली ताकत :
- आर्थिक आजादी: मुद्रा लोन की 60% आज़ादी महिलाएं है।
- मालिकाना हक़: 3 करोड़ से ज़्यादा महिलाये अब अपने पक्के घर की मालिक है।
- सुरक्षा और सम्मान: स्वच्छ भारत और जल जीवन मिशन में ग्रामीण महिलाओं का जीवन आसान बनाया है।
यह सिर्फ संसद में सीट बढ़ने की घोषणा नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को शासन में बराबर का भागीदार बनाने की क्रांति है। जब संसद में 273 सीटों पर महिलाये बैठेगी, तो गांव के विकास और सुरक्षा के मुद्दे भी संवेदनशीलता से उठेंगे। भजनलाल सरकार के ‘पेपर माफिया’ के एक्शन के बाद, अब केंद्र का महिलाओं के लिए जागरूक होना, 2029 के चुनावी समीकरण बदल सकता है।
“इस बिल से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए भारतीय संसद की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।”
राजस्थान में पंचायतों, ग्राम सभाओं और ग्रामीण योजनाओं से जुड़ी ताज़ा खबरें गाँव मंच के पंचायत सेक्शन में भी उपलब्ध हैं।
– Deepanshu Kasera, Journalist


