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रक्षा विनिर्माण में राजस्थान की बड़ी छलांग, किशनगढ़ बनेगा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब

गांव मंच डेस्क, राजस्थान अब रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की तैयारी कर रहा है। इसी उद्देश्य से जयपुर में “रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता” विषय पर कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान सरकार, रीको और इन्वेस्ट इंडिया ने संयुक्त रूप से किया। इसमें रक्षा मंत्रालय, डीआरडीओ, उद्योग जगत, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य रक्षा उत्पादन में नई संभावनाओं को तलाशना था। साथ ही, इस क्षेत्र की चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

डिफेंस सेक्टर में बढ़ रहे अवसर

  • कार्यशाला में बताया गया कि भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार लगातार स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दे रही है।
  • पिछले कुछ वर्षों में रक्षा निर्यात और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश का लक्ष्य विदेशी निर्भरता कम करना है।
  • इसी कारण निजी उद्योगों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
  • विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले वर्षों में रक्षा तकनीक और उत्पादन में बड़े निवेश की संभावना है।

राजस्थान की ताकत बनी निवेशकों की पसंद

  • चर्चा के दौरान राजस्थान की विशेषताओं को भी सामने रखा गया। राज्य में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है।
  • इसके अलावा बेहतर सड़क, रेल और हवाई संपर्क मौजूद हैं।
  • मजबूत इंजीनियरिंग क्षमता और सक्रिय एमएसएमई नेटवर्क भी राज्य की बड़ी ताकत हैं।
  • हाल ही में लागू राजस्थान एयरोस्पेस एवं डिफेंस नीति-2026 निवेशकों को कई प्रोत्साहन देती है।
  • यही कारण है कि राज्य अब रक्षा उद्योग के लिए आकर्षक गंतव्य बन रहा है।
  • विशेषज्ञों ने माना कि राजस्थान भविष्य में राष्ट्रीय रक्षा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

किशनगढ़ में बनेगा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब

  • कार्यशाला में रीको ने एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की। अजमेर जिले के किशनगढ़ स्थित उदयपुर खुर्द क्षेत्र को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
  • इसके साथ ही ड्रोन निर्माण, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, भूमि आधारित रक्षा प्रणालियों और एमआरओ सेवाओं में संभावनाओं पर चर्चा हुई।
  • प्रिसीजन इंजीनियरिंग क्षेत्र को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई। वहीं, दौसा-बांदीकुई और कोटा को भविष्य के औद्योगिक निवेश केंद्रों के रूप में चिन्हित किया गया।

सहयोग से बनेगा मजबूत रक्षा इकोसिस्टम

  • कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने सरकार और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
  • शिक्षण संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। विशेषज्ञों का मानना है
  • कि कौशल विकास और नवाचार से रक्षा क्षेत्र को नई गति मिलेगी।
  • कार्यशाला से मिले सुझाव राज्य स्तरीय रिपोर्ट में शामिल होंगे।
  • ये सुझाव राष्ट्रीय रक्षा विनिर्माण रोडमैप तैयार करने में भी मदद करेंगे।
  • इससे राजस्थान को देश के अग्रणी रक्षा विनिर्माण राज्यों में शामिल करने का रास्ता मजबूत होगा।

Edited by- Ankit Tiwari

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